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नई दिल्ली | नोट बंदी के फैसले को कालेधन पर एक चोट बताने वाली केंद्र सरकार को 2000 के नए नोट ने कठघरे में खड़ा किया हुआ है. कुछ अर्थशास्त्रियो का मानना है की 2000 का नोट देश में भ्रष्टाचार और कालेधन को और बढ़ावा देगा. उधर प्रमुख विपक्षी पार्टी ने 2000 के नोट की क़ानूनी वैधता पर ही सवाल खड़े कर दिए है. इसके अलावा मद्रास हाई कोर्ट में भी 2000 के नए नोट को लेकर एक याचिका डाली गयी है.

कांग्रेस नेता और राज्यसभा संसद आनदं शर्मा ने आज एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की. इस प्रेस कांफ्रेंस में आनंद शर्मा ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया की उन्होंने 2000 का नया नोट गैर क़ानूनी तरीके से जारी किया है. किसी भी नए नोट को जारी करने से पहले रिज़र्व बंद अधिसूचना जारी करता है. इस नए नोट के समय यह अधिसूचना जारी नही की गयी.

आनंद शर्मा ने कहा की 2000 के नए नोट को जारी करते समय कानून का पालन नही किया गया. इसी वजह से यह नोट अवैध और गैर क़ानूनी है. जो लोग नए नोट को लेकर तर्क दे रहे है और इस कदम को सही बता रहे है , उनको संविधान की जानकारी नही है. उधर मद्रास हाई कोर्ट में भी 2000 के नोट की वैधता को लेकर एक याचिका डाली गयी.

याचिकाकर्ता का कहना है की इस नोट के डिजाईन में 2000 के अंक को देवनागरी में लिखा गया है. जो लिपि अनुच्छेद 343 (1) के विपरीत है. अनुच्छेद 343 के अनुसार शासकीय भाषाओ में किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए कानून की जरूरत है और राज भाषा कानून के अनुसार अंको में किसी भी परकार के बदलाव की अनुमति नही है. याचिकाकर्ता ने नए नोट को रद्द करने की मांग की. वही कोर्ट ने इस मामले में वित्त मंत्रालय को नोटिस दे जवाब माँगा है.


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