मटियाबुर्ज की रहने वाली एक लड़की ने पश्चिम बंगाल कमर्शल टैक्स सर्विस में टॉप करके इतिहास रच दिया है। वह इस मामले में पहली मुस्लिम महिला टॉपर हैं। सुरैया गफ्फार की उपलब्धि इस मायने में बहुत अहमियत रखती है कि वह पिछड़ा वर्ग के तहत मिलने वाला आरक्षण पाने योग्य थीं, उसके बावजूद उन्होंने एक जनरल कैंडिडेट के तौर पर ‘राज्य की सबसे कठिन परीक्षा’ पास की है। यह चीज प्रतिभाशाली मुस्लिम छात्रों के बीच ओबीसी रिजर्वेशन छोड़ने के रुझान को दिखाता है। कमर्शल टैक्स कैटिगरी में टॉप करने वाले 5 छात्रों में से 3 मुस्लिम हैं जिनलोगों जो रिजर्वेशन पाने के पात्र होने के बावजूद सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के तौर पर परीक्षा पास की है। मोहम्मद शब्बर खान ने दूसरी पोजिशन और मोहम्मद अजहर खान ने पांचवीं पोजिशन हासिल की है। कुल 40 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की है।
कमर्शल टैक्स सर्विस की पहली मुस्लिम महिला टॉपर बनीं सुरैया23 साल की सुरैया को पूरा विश्वास था कि उनका मजबूत ऐकडेमिक बैकग्राउंड उनको सफलता दिलाएगा। उन्होंने कहा, ‘मैं चाहती तो रिजर्वेशन का सहारा ले लेती लेकिन मैंने फैसला किया मैं सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार के रूप में परीक्षा देकर अपने कौशल को आजमाऊंगी। मैंने सोचा, चूंकि मेरी उम्र कम है इसलिए मैं कई प्रयास कर सकती हूं।’ उनके पति मकसूद हसन पश्चिम बंगाल पुलिस सर्विस में हैं। अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि सुरैया कमर्शल टैक्स सर्विस टॉप करने वाली पहली मुस्लिम लड़की है।

2014 में पश्चिम बंगाल कमर्शल सर्विस की परीक्षा में करीब 50,000 अभ्यर्थी बैठे थे जिनमें से 4,000 छात्रों ने दूसरे चरण के लिए क्वॉलिफाई किया जिसे मेन्स का नाम दिया जाता है। सिर्फ 400 छात्र ही ग्रुप ए और ग्रुप बी में सूचीबद्ध सर्विसेज के लिए इंटरव्यू के चरण में पहुंचे। कमर्शल टैक्स सर्विस के अलावा ग्रुप ए में एग्जिक्युटिव, लेबर, एक्साइज और ऐग्रिकल्चरल सर्विसेज शामिल है। ग्रुप बी में राज्य पुलिस सर्विस शामिल है। पिछले सप्ताह परिणामों की घोषणा की गई थी।

सुरैया अपने परिवार में पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। उनके परिवार की आमदनी के साधन सीमित हैं। उनके पिता अब्दुल गफ्फार खान गार्डन रीच शिपबिल्डर्स ऐंड इंजिनियर्स लिमिटेड के विद्युत विभाग में हैं। बाधाओं पर विजय पाना मटियाबुर्ज की रहने वाली इस लड़की के लिए कोई नई बात नहीं है। एक स्थानीय स्कूल से अपनी हायर सेकंडरी की पढ़ाई करने के बाद सुरैया ने सेंट्रल कोलकाता के एक कॉलेज में केमिस्ट्री ऑनर्स कोर्स में दाखिला लिया। कॉलेज आने-जाने में उनको रोजाना करीब 2 घंटे का समय लगता था।

सुरैया अपने पिता को अपना रोल मॉडल मानती हैं और उन्होंने 2014 में अपनी शादी के बाद भी अपने पिता के सपने को चकनाचूर नहीं होने दिया। कड़ी मेहनत, मजबूत इरादा और संयम ने सुरैया को पहले ही प्रयास में पश्चिम बंगाल कमर्शल सर्विस के लिखित और इंटरव्यू चरण को निकालने में मदद की।

सुरैया अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पति मकसूद को भी देती है जिन्होंने शादी से पहले भी सुरैया को प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने स्टडी मटीरियल, ट्यूटोरियल्स से सुरैया की मदद की और उनके लिए रिसर्च वर्क भी किया ताकि वह अपनी स्टडी पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर सकें। साभार: नवभारत टाइम्स


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