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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन ने बेंगलूरु में अपने आलोचकों को मजकिया अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि मुझे ऐसा लगा कि पिछले कुछ दिनों से मैंने अपनी विदाई के बारे में काफी पढ़ा है, लेकिन अभी भी ढाई महीने मेरा कार्यकाल बचा हुआ है.

उन्होंने रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए कहा कि कमजोर ऋण वृद्धि का कारण ऊंची ब्याज दर नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर फंसे कर्ज का दबाव होना है. राजन ने रिजर्व बैंक के अधिशेष कोष का उपयोग सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को पूंजी उपलब्ध कराने के लिए करने के सुझाव को भी खारिज कर दिया.

राजन ने भारत को चीन से प्रतिस्पर्धा करने बजाय प्रेरणा लेने को कहा हैं. राजन ने कहा कि ‘मैं मानता हूं कि हमें चीन को प्रेरणा के तौर पर देखना चाहिए. चीन से हम यह सबक सीख सकते हैं कि कैसे कोई देश तीन दशकों में तरक्की कर सकता है यदि उसका इस बात पर पक्का विश्वास हो कि उसे क्या चाहिए.’

राजन ने कहा कि मैं यह कहने वाला आखिरी व्यक्ति होऊंगा कि हमें भी वह उस रास्ते पर चलने की जरूरत है, जिस पर वे चले हैं. आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘हम नहीं चल सकते क्योंकि वह पहले ही इस रास्ते पर है. वह वहां पहले से ही हैं और आगे का रास्ता खुला नहीं है. किसी ने पहले ही उस रास्ते को घेर रखा है.’

राजन ने कहा, ‘हम निश्चित तौर पर चीन से प्रेरणा ले सकते हैं, ऐसा संभव है. अभी हम उस स्थिति में हैं, जहां चीन 1990 के आखिर या 2000 के दशक की शुरुआत में था. उम्मीद है कि 10 से 15 साल बाद हम उस स्तर पर होंगे, जहां चीन आज है. मैं इस बारे में भविष्यवाणी नहीं करूंगा कि हम चीन से मुकाबले की स्थिति में कब पहुंच पाएंगे, लेकिन उम्मीद है कि हम ऐसा कर पाएंगे.


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