केंद्र की मोदी सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को हिंसा ग्रस्त म्यांमार भेजने के फैसले पर अडिग है. केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में इस सबंध में एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमे रोहिंग्या मुस्लिमों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया गया है.

हलफनामे में कहा गया कि रोहिंग्याओं के आतंकी समूहों से संबंध हो सकते हैं और हो सकता है कि इन लोगों को आईएसआईएस द्वारा इस्तेमाल किया जाए. केंद्र सरकार ने न्यायालय से इस मामले में दखल न देने की अपील करते हुए कहा कि सरकार का ये फैसला देशहित में है.

ध्यान रहे देश में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों को भेजने की मोदी सरकार ने तैयारी कर ली है. जिसकी हाल ही में सयुंक्त राष्ट्र ने तीखी आलोचना की थी. भारत में रोहिंग्या समुदाय जम्मू, हैदराबाद, हारियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली एनसीआर और राजस्थान में रह रहा हैं.

संयुक्त राष्ट्र हाई कमिश्नर (ह्यूमन राइट्स) ज़ेद रा’आद अल हुसैन ने भारत सरकार के रोहिंग्या को वापिस म्यांमार भेजे जाने की बात पर कहा था कि भारत इस तरह लोगों को ऐसी जगह वापिस नहीं भेज सकता जहां लोगों को प्रताड़ना का खतरा है.

गौरतलब रहें कि सयुंक्त राष्ट्र के मुताबिक म्यांमार में हिंसा के चलते 1000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके है. साथ ही 400000 से ज्यादा बांग्लादेश पलायन कर चुके है.


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