पिछले 9 महीनों से लापता जेएनयू छात्र नजीब अहमद के बारे में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी भी कोई पता नहीं लगा पाई. सीबीआई की और से दिल्ली हाईकोर्ट में सीलबंद स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल कर जांच के लिए और समय की मांग की गई. इस मामले की अगली सुनवाई 8 अगस्त को होगी.

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट  ने 16 मई को सीबीआई को आदेश दिया था कि वह नजीब के रहस्यमय तरीके से लापता होने की परिस्थतियों की जांच करे. इसके बाद 29 जून को सीबीआई ने नजीब का सुराग देनेवाले को दस लाख रुपए का ईनाम देने की घोषणा की थी. हालांकि इससे पहले दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच भी इस मामले को देख चुकी है.

सीबीआई की ओर से और वक्त मांगने के को लेकर JNU के स्टूडेंट यूनियन (JNUSU) ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी भी मोदी सरकार में ‘दबाव’ में है. JNUSU अध्यक्ष मोहित कुमार पांडे ने कहा कि सीबीआई जांच के तहत नजीब के बारे में सुराग को लेकर अब तक खाली है.

मोहित ने कहा, ‘लापता होने से पहले नजीब पर हमले को लेकर जांच में उदासीनता दबाव को दिखाता है जिसका सामना मोदी सरकार के तहत दिल्ली पुलिस और सीबीआई जैसे संस्थानों को करना पड़ रहा है.’ गौरतलब रहें कि 4 अक्टूबर की रात से जेएनयू के हॉस्टल माही-मांडवी से लापता होने से पहले कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) के सदस्यों ने हॉस्टल में उससे मारपीट की थी.


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