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नोयडा | नोट बंदी के बाद देश के हालात किस कदर ख़राब हो चुके है इसके उदहारण रोज सुनने को मिल जाते है. कही पैसो की किल्लत की वजह से लोगो के रोजगार खत्म हो रहे है , कही किसी की शादी टूट रही है और कही किसी की पत्नी और माँ का अंतिम संस्कार नही हो पा रहा है. बैंकों के पास कैश नही है और एटीएम खाली या बंद पड़े है. ऐसे में एक आम आदमी कैसे अपन गुजर बसर कर सकता है.

ताज़ी घटना नोयडा के जेजे सेक्टर की है. यहाँ एक ठेला लगाने वाले सिर्फ इसलिए अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार नही कर पाया क्योकि उसके पास इसके लिए पैसे नही थे. हाँ उसके बेटे के अकाउंट में पैसे थे लेकिन वहां से भी उसको मायूसी ही हाथ लगी. हालाँकि इलाके के थाना इंचार्ज ने दरियादिली दिखाते हुए इस शख्स को 2500 रूपए दिए तब जाकर यह अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार कर सका.

अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार नोयडा के जेजे सेक्टर में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर मुन्नी लाल की पत्नी फूलमती का निधन मंगलवार को हो गया. 61 वर्षीय फूलमती को पेट का कैंसर था. मुन्नी लाल ने बताया की मंगलवार को उनकी पत्नी की तबियत खराब हुई तो वो उसे धर्मशाला हॉस्पिटल लेकर पहुंचे. लेकिन अस्पताल ने उनकी पत्नी को प्राइवेट हॉस्पिटल में रेफर कर दिया.

यहाँ उनकी पत्नी ने दम तोड़ दिया. जितने भी पैसे मुन्नी लाल के पास थे वो उनकी पत्नी के इलाज में खर्च हो गए. मुन्नीलाल के पास अब अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार करने के भी पैसे नही थे. हालाँकि उसके बेटे के अकाउंट में करीब 16 हजार रूपए जमा थे. इसी को देखते हुए मुन्नी लाल बैंक पहुंचा लेकिन बैंक में कैश न होने की वजह से मुन्नी लाल को पैसे नही मिले.

मुन्नी लाल ने बैंक मैनेजर से काफी मिन्नतें की लेकिन बैंक में कैश नही होने की वजह से वो भी उनकी मदद नही कर पाए. जब यह सूचना इलाके के थाना इंचार्ज को मिली तो उन्होंने मुन्नी लाल की मदद की. उन्होंने मुन्नी लाल को 25 सौ रूपए दिए वही बैंक में भी कैश का इंतजाम कराकर उनको 15 हजार रूपए दिलवाए. मुन्नी लाल उत्तर प्रदेश के गौंडा से 22 साल पहले नोयडा आये थे. यहाँ वो फलो का ठेला लगाते है.


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