नई दिल्ली | पिछले साल 8 नवम्बर को नोट बंदी की घोषणा होने के बाद पुरे देश में कैश की भारी किल्लत हो गयी थी. सरकार ने एक झटके में करीब 15 लाख करोड़ रूपए मूल्य के नोट बंद कर दिए थे जिसकी वजह से पुरे देश में कैश का फ्लो रुक गया था. इसका एक बड़ा कारण यह भी था की नोट बंदी करने से पहले आरबीआई ने पर्याप्त मात्रा में नए नोट नहीं छापे थे.

हालाँकि सरकार ने दावा किया था की 50 दिन के अन्दर स्थिति सामान्य हो जाएगी लेकिन ऐसा नही हुआ और करीब पांच महीने बाद स्थिति सामने होनी शुरू हुई. 13 मार्च के बाद सरकार ने नगद निकासी पर लगी सीमा को भी हटा दिया. तब यह माना जा रहा था की अब आरबीआई के पास पर्याप्त मात्रा में नए नोट आ गए है और पुरे देश में भी कैश का फ्लो नोट बंदी से पहले वाली स्थिति में आ चूका है.

लेकिन शायद आरबीआई एक बार फिर स्थिति का सही आंकलन करने में नाकाम रहा. क्योकि अप्रैल के मध्य आते आते देश में दोबारा कैश की किल्लत होनी शुरू हो गयी. फ़िलहाल एटीएम और बैंकों में कैश की स्थिति नोट बंदी के समय जैसी हो गयी है. ज्यादातर एटीएम पर ‘नो कैश’ का बोर्ड टंगा है तो बैंक वाले दोबारा कैश न होने का रोना रो रहे है.

हालाँकि मोदी सरकार अभी भी स्थिति सामान्य होने का दावा कर रही है लेकिन हकीकत इसके बिलकुल उलट है. अभी कुछ दिन पहले केरल से खबर आई थी की वहां ज्यादातर एटीएम कैशलेस हो चुके है. कमाबोश अब यही स्थिति पुरे देश में है. खुद हिताची पेमेंट सर्विसेज जो देश के करीब 50,000 एटीएम संचालित करती है, उसने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा की पिछले कुछ दिनों से डिमांड बढ़ रही है जबकि बैंक हमें पर्याप्त कैश देने में असमर्थता जाहिर कर रहा है.


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