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इस्लाम में सभी इंसानों को बराबर का हक़ दिया गया हैं. अल्लाह के नजदीक न कोई बड़ा हैं न छोटा. कोई भी व्यक्ति इस्लाम में तकवा और परहेजगारी (कर्म और बुरे कामों से शुद्धता) की बदोलत ही अल्लाह के नजदीक होता हैं. इसी बात को ध्यान में रखकर मुसलमानों ने सदियों से चले आ रहे दलितों के साथ भेदभाव के लिए एक मुहीम शुरू की.

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लखनऊ के कैसरबाग में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद और नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ दलित ऑर्गनाइजेशंस की सरपरस्ती में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे मुसलमानों ने दलित भाइयों के साथ एक ही बर्तन में साथ खाना खाया. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महमूद मदनी ने इस तरह के कार्यक्रम को आगे भी आयोजित करने को कहा हैं.

महमूद मदनी ने इस कार्यक्रम का उद्देश सामजिक भेदभाव को समाप्त करना बताया हैं. उन्होंने कहा कि सदियों से दलितों के हो रहें इस भेदभाव को समाप्त करने की जरुरत हैं.

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उन्होंने इस कार्यक्रम के पीछे किसी भी राजनितिक मकसद को नकारते हुए कहा कि मदनी ने कहा कि उनका मकसद राजनितिक नहीं हैं. वह सिर्फ सामाजिक सद्भाव के लिए यह आयोजन कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे.


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