islamic-bank-india 30 08 2016

रिजर्व बैंक यानी आरबीआई और सरकार देश में इस्लामिक बैंकिंग (ब्याज मुक्त बैंकिंग) शुरू करने जा रही हैं. इस्लामिक या शरिया बैंकिंग पूरी तरह ब्याज के लेनदेन से रहित वित्तीय प्रणाली है.

इसके तहत काम करने वाले बैंक न तो ग्राहकों से ब्याज लेते हैं और न ही उन्हें देते हैं. इसमें ग्राहकों का पैसा ऐसी जगह निवेश किया जाता है, जिसे इस्लाम में हलाल माना गया है. स तरह की बैंकिंग शुरू करने के पीछे मकसद समाज के उस वर्ग को भी बैंकिंग के दायरे में लाना है, जो कि धार्मिक कारणों से इससे दूर है.

और पढ़े -   सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कानून और शरीयत में टकराव, अगर मुस्लिम शरीअत को चुने तो ?

रिजर्व बैंक ने 2015-16 की अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है, ‘भारतीय समाज का एक तबका है, जो कि धार्मिक कारणों से वित्तीय तंत्र से अलग है. यह तबका बैंकों के ब्याज सुविधा वाले उत्पादों से इसका लाभ नहीं उठाता है.’

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘बैंकिंग तंत्र से अलग रह गए तबके को इसमें शामिल करने के लिए सरकार के साथ विचार विमर्श कर देश में ब्याज-मुक्त बैंकिंग उत्पाद पेश करने के तौर तरीकों को तलाशने का प्रस्ताव किया गया है.’

और पढ़े -   देखे वीडियो: लद्दाख में चीनी सैनिकों ने पत्थरबाजी के साथ भारतीय सैनिकों से की थी हाथापाई

इस साल की शुरुआत में जेद्दा स्थित इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक (आईडीबी) ने अपनी पहली शाखा अहमदाबाद में खोलने की घोषणा कीh.


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE