रवीश कुमार, वरिष्ट पत्रकार

नई दिल्ली | एनडीटीवी के मशहूर पत्रकार रविश कुमार ने देश में बढती बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने इसके लिए जीएसटी-नोट बंदी को जिम्मेदार ठहराया है. रविश कुमार के अनुसार नोट बंदी की वजह से ठप्प हुए कारोबारों पर जीएसटी ने दोहरी मार डाली है. यही वजह है की कई ऐसे बड़े सेक्टर जो नौकरी सर्जित करने में सबसे आगे रहते थे, अब अपने यहाँ से कर्मचारियों की छटनी कर रहे है.

शुक्रवार को रविश कुमार ने फेसबुक पोस्ट के जरिये मोदी सरकार की नीतियों पर निशाना साधा. उन्होंने बिजनेस स्टैण्डर्ड की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा,’ बिजनेस स्टैंडर्ड में टी ई नरसिम्हन की रिपोर्ट छपी है, तिरुपुर की. यह जगह कपड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है. यहां नोटबंदी के पहले 1200 यूनिट और दूसरे अन्य काम मिलकर 15,000 करोड़ से अधिक का कारोबार कर रहे थे. आज 40 प्रतिशत भी नहीं रहा.’

रविश आगे लिखते है,’ साउथ इंडिया कॉलर शर्ट एंड इनर वीयर स्मॉल स्केल मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के महासचिव के एस बाबुजी का कहना है कि उनके संगठन के तहत 2000 से अधिक यूनिट थे, 30-40 फीसदी बंद हो गई हैं. इनमें 60,000 से 80,000 लोगों को काम मिल रहा था. 2016 की दिवाली की तुलना में इस दिवाली मार्केट 30 प्रतिशत कम आर्डर मिले हैं.’ रविश ने नरसिम्हन के हवाले से लिखा की यह सब नोट बंदी और जीएसटी की दोहरी मार की वजह से हो रहा है.

रविश कुमार ने आईटी से लेकर टेलिकॉम सेक्टर में घट रही नौकरियों पर भी चिंता जताई. उन्होंने लिखा की नैसकॉम ने अनुमान लगाया था कि आई टी सेक्टर में ग्रोथ रेट कम होने के बाद भी इस साल 1,30,000 से 1,50,000 नौकरियां दी जाएंगी मगर कई बड़ी कंपनियों ने उल्टा छंटनी कर दी है और तेज़ी से आटोमेशन की तरफ़ बढ़ रहे हैं।.दो तीन कंपनियों ने मिलकर 10,000 से अधिक की छंटनी कर दी है. कुछ ऐसा ही हाल टेलिकॉम सेक्टर का भी है, यहाँ भी अगले एक साल में 20 से 30 हजार कर्मचारियों की छंटनी होने का अनुमान है.

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