नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के भाषण को लेकर चारो तरह एक बहस छिड़ी हुई है। राजनीतिक जगत से लेकर खेल जगत और मनोरंजन जगत के लोग भी इस भाषण को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जहां हाल ही में टीम इंडिया के स्टार सुरेश रैना कन्हैया कुमार के समर्थन में सोशल मीडिया पर नजर आए थे वहीं अब अर्जुन पुरस्कार विजेता बॉक्सर मनोज कुमार ने कन्हैया के खिलाफ जमकर मोर्चा खोल दिया है।

बॉक्सर मनोज कुमार ने कन्हैया के खिलाफ लिखा पोस्ट,... देशद्रोही हीरो बन जाएगा!

उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर एक लेख शेयर करते हुए कन्हैया कुमार पर हमला बोला है। उन्होंने लिखा है कि “रामचन्द्र जी कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा। देशभक्त सुनेंगे ताने-तुनके, देशद्रोही हीरो बन जाएगा, टीवी पे लाईव भाषण सुनाएगा।

दोस्तों सोच रहा था इस बारे में बात करुं या नही ? फिर दिल ने कहा कि जब देश की बर्बादी के नारे लगाने वाले ज़ोर-शोर से बोल सकते हैं, भाषण झाड़ सकते हैं तो फिर हम देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ी चुप रह गए तो ये भी ग़लत होगा।

दोस्तों कल से देख रहा हूँ कि एक शख़्स जो कल तक देश की बर्बादी के नारे लगाने वालों के साथ खड़ा था या यु कहें उनका नेता था, उसी शख़्स को आज कुछ लोग हीरो बनाने पर तुले हुए हैं । क्या हमारी राजनीति इतनी गिर चुकी है?

बहुत से नेता उसे बधाई दे रहे थे, मानो वह देशद्रोह नही देश प्रेम के आरोप में जेल गया हो । कल तक यही नेता कह रहे थे वह ग़रीब है उसका पिता लक़वे से ग्रस्त है , परिवार के पास आय के साधन नही हैं, मात्र तीन हज़ार महीने में घर का गुज़ारा हो रहा है । तो भइया पैंतीस साल का लड़का अपने ग़रीब माँ बाप का सहारा बनने की बजाए ब्रांडिड कपड़े पहन कर फारच्युनर गाड़ी में जेल से निकलता है और फिर बड़े बड़े भाषण देगा तो ग़रीबी दूर हो जाएगी ?

ग़रीबी काम करने से दूर होगी, मेहनत से दूर होगी और देश के लिए कुछ करने से होगी । ग़रीबी के ख़िलाफ अगर ऐसा आदमी भाषण दे रहा हो जिसका पिता बिमारी से बिना इलाज के जूझ रहा हो, जिसकी माँ मुश्किल से 2 वक्त की रोटी बना पाती हो और ऐसे माँ बाप का बेटा एक पैसा अपनी मेहनत से उनको कमा कर नही दे रहा हो, तो मुझे नही लगता कि उस घर की गरीबी कभी दूर हो पायेगी और ऐसे शख्स को हमारी मीडिया इस तरह पेश कर रही है जैसे गरीबी को खत्म करने के लिए भगत सिंह ने जन्म ले लिया हो ।

कल से बहुत से नेता, पत्रकार बंधु और बुद्धिजीवी उसके भाषण की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं । लेकिन क्या किसी ने नोटिस किया कि कितनी खूबी से देशद्रोह के मुद्दे को, अफजलगुरू को शहीद बनाने को और उसकी बरसी पर कार्यक्रम आयोजित कर भारत की बर्बादी के नारों को नजरअंदाज कर दिया गया, दबा दिया गया । क्या कन्हैया ने अपने भाषण में कोई समाधान दिया गरीबी से लड़ने का ? क्या कोई प्लान रखा है कि हम इस तरीके से लड़ेंगे गरीबी के खिलाफ ? तो फिर कैसे अच्छा हो गया उसका भाषण ? क्या ख़ास बात थी उसके भाषण में जो उससे हमारे देश के उस प्रधानमंत्री से भी बड़ी कवरेज देने की कोशिश हो रही है जो 16-16 घंटे काम कर रहा है इस देश के लिए ।

दोस्तों बहुत से सवाल हैं, बहुत सी दुविधाएं हैं लेकिन हमेशा ऐसा ही होता आया है हमारे देश में कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी लोग असली मुद्दे से ऐसे भटका देते हैं कि आप और हम जैसे साधारण लोग समझ ही नही पाते कि बात आखिर थी क्या ।

लेकिन मैं आप सब से गुजारिश करता हूँ कि इस बार ऐसा न होने दें । और इस सवाल को उठाते रहें कि देश द्रोहियों का साथ देने वालों के साथ क्यों ये लोग, ये राजनेता खड़े हो जाते हैं । क्यों विदेशों की तरह पूरा देश देश को तोड़ने की बात करने वालों के खिलाफ एक साथ नही खड़ा होता ?

आप किसके साथ हैं ये आपको तय करना है, लेकिन मैं अपने देश के साथ हूँ, अपने हिंदुस्तान के साथ हूँ, अपने तिरंगे के साथ हूँ। जय हिन्द, जय भारत। (ibnlive)


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