मुंबई | दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन ISIS फ़िलहाल खात्मे की और है. ईराक में उसके सबसे बड़े गढ़ मोसुल में इराकी सेनाओं को कब्ज़ा हो चूका है. हालाँकि ISIS पिछले दो साल से पूरी सुर्खियों में है लेकिन इस आतंकी संगठन का अस्तित्व कई साल पहले से है. पहले यह संगठन ISIL के नाम से आतंक मचा रहा था. इस दौरान दुनिया भर के काफी लोगो ने इस संगठन को ज्वाइन किया. इनमे भारत के भी कुछ लोग शामिल थे.

ऐसे ही एक शख्स अरीब मजीद को NIA ने गिरफ्तार किया था. अरीब पर आतंकी संगठन IS को ज्वाइन करने का आरोप था. हालाँकि स्पेशल कोर्ट में NIA यह साबित करने में नाकाम रहा की अजीब किसी भी आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा. इसलिए स्पेशल कोर्ट ने अरीब पर अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन (UAPA) एक्ट के तहत कार्यवाही करने से मना कर दिया. इसके अलावा कोर्ट ने अजीब से यह चार्ज भी हटाने का निर्देश दिया.

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स्पेशल कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ NIA ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया. बुधवार को इस मामले की सुनवाई की गयी. लेकिन हाई कोर्ट ने भी NIA की सभी दलीलों को ख़ारिज करते हुए कहा की अरीब के खिलाफ ऐसे कोई भी पुख्ता सबूत नही है की वो आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है. इस दौरान NIA की और से दलील दी गयी की अरीब ने अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ मिलकर एक आतंकी समूह का गठन किया.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर अनुसार NIA के वकील प्रकाश शेट्टी का कहना था की चार्जशीट के अनुसार अरीब ने एक आतंकी गुट का गठन किया जो UAPA के तहत एक अपराध है. इसलिए अजीब पर UAPA के तहत कार्यवाही होनी चाहिए. इस पर अरीब के वकील मुबीन सोलकर ने कोर्ट को बताया की NIA ने अजीब के खिलाफ जो ड्राफ्ट तैयार किया है उसमे अरीब पर केवल IS ज्वाइन करने का आरोप है, आतंकी गुट बनाने का नहीं. सोलकर की दलील से संतुष्ट होकर जस्टिस साधना जाधव और जस्टिस रंजित मोरे ने NIA की अपील ख़ारिज कर दी.

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