सहारनपुर | आंबेडकर शोभा यात्रा निकालने को लेकर सहारनपुर में शुरू हुई हिंसा दलितों और ठाकुरों के बीच जातीय संघर्ष पर आकार खत्म हुई. पहले अप्रैल में बीजेपी सांसद राघव लखनपाल और उनके समर्थको ने सहारनपुर में खूब उत्पात मचाया जबकि मई में दलितों और ठाकुरों के बीच जबदस्त जातीय संघर्ष देखने को मिला जिसमे कई लोगो की मौत भी हो गयी. इन दोनों घटनाओ के लिए प्रशासन ने बीजेपी सांसद और भीम आर्मी को जिम्मेदार ठहराया.

अब इस बात की पुष्टि योगी सरकार ने भी कर दी है. गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में सरकार ने राघव लखनपाल और भीम आर्मी को सहारनपुर में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार माना है. इसके अलावा सहारनपुर के स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियो के बीच समनव्य न होने को भी घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया गया. करीब 6 पन्नो की इस रिपोर्ट में कहा गया की सहारनपुर में एक सोची समझी साजिश के तहत जातीय हिंसा को बढ़ावा दिया गया.

इसमें भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण और पूर्व बसपा विधायक रविंदर की महती भूमिका निभाई. रिपोर्ट में कहा गया की चंद्रशेखर की अगुवाई में भीम आर्मी ने राजपूतो और दलितों के बीच जानबूझकर हिंसा को बढ़ावा देनी का काम किया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया की राजनितिक फायदा उठाने के मकसद से कुछ राजनितिक संगठनो ने हिंसा को बढाया. अपनी बात को सही साबित करने के लिए रिपोर्ट में सहारनपुर में हुई पिछले हिंसक घटनाओ का भी जिक्र किया गया.

न्यूज़ चैनल आजतक के अनुसार रिपोर्ट में बताया गया की सहारनपुर में कब कब और किस राजनितिक संगठन ने यहाँ हिंसा फैलाने की कोशिश की. इसके अलावा सरकार ने माना की हिंसा रोकने के लिए प्रशासन और पुलिस में समनव्य की भी कमी दिखी. प्रशासन ने बिना पुलिस से सलाह मशविरा करे, महाराणा प्रताप जयंती मनाने की इजाजत दे दी. रिपोर्ट में बीजेपी सांसद राघव लखनपाल के बारे में बताया गया की उन्होंने जानबूझकर आंबेडकर शोभा यात्रा को अल्पसंख्यक इलाके से गुजारा जबकि उनके पास शोभायात्रा के लिए अनुमति भीं नही थी.


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