प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने ही सांसदों पर सांसद आदर्श ग्राम योजना का रंग नहीं चढ़ पा रहा है। जिसके वजह से इस योजना को लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों को अभी से चिंता सता रही है। वे सांसत में हैं। पीएम मोदी की स्वपनिल योजना होने के वजह से अधिकारियों पर किसी भी तरह से योजना को परवान चढ़ाने का दबाव है। पीएमओ की ओर से योजना की सफलता को लेकर लगातार अपडेट भी मांगे जा रहे हैं। मगर योजना के प्रति भाजपा सांसदों के जरिए ही उत्साह न दिखाने से मंत्रालय के अधिकारी परेशान हैं।

लगातार आग्रह के बाद भी सांसद दूसरे चरण के लिए गांव गोद लेने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सभी सांसदों को पत्र लिखकर 31 जनवरी तक दूसरे चरण के गांव गोद लेने का आग्रह किया था। लेकिन उस पत्र का भी असर सांसदों पर होता नहीं दिख रहा है। लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को मिलाकर कुल 40 सांसद ही योजना के दूसरे चरण के लिए गांव गोद ले सके हैं। मंत्रियों का आलम भी कुछ ऐसा ही है। इन 40 सांसदों में सरकार के 10 मंत्री हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय को प्राप्त आंकडों के अनुसार पीएम मोदी के अलावा महज सुषमा स्वराज, रामविलास पासवान, चौ. बीरेंद्र सिंह, अशोक गजपति राजू, थावर चंद गहलौत, बंडारू दत्तात्रेय, जितेंद्र सिंह, बाबुल सुप्रियो, मुख्त्तार अब्बास नकवी और निर्मला सितारमन सरीखे सरकार के मंत्री ही दूसरे चरण के लिए अपने गांव का नाम तय कर पाए हैं।

यूपी में सांसद आदर्श गांवों की संख्या सर्वाधिक

लोकसभा और राज्यसभा के कुल 788 सांसदों में से जिन 40 सांसदों ने दूसरे चरण के लिए अपने गांव के नाम तय किए हैं। उनमें से यूपी से लोकसभा चुनाव जीतकर आए सांसदों की संख्या 5 है। तो राज्य सभा के 1 सांसद हैं। यूपी से पीएम मोदी के अलावा जिन सांसदों ने दूसरे चरण के लिए अपने गांव गोद लिए हैं। उनमें इलाहाबाद के सांसद श्यामाचरण गुप्त, उन्नाव से साक्षी महाराज, चंदौली से महेंद्र नाथ पाण्डे और फर्रूखाबाद के मुकेश राजपूत का नाम शुमार हैं। मुख्त्तार अब्बास नकवी यूपी से राज्यसभा के एकमात्र सांसद हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत दूसरे चरण के लिए गांव गोद लिया है।

तो दिल्ली, उत्तराखंड और पंजाब के किसी भी सांसद ने दूसरे चरण के तहत गोद लेने के लिए गांव की पहचान अब तक नहीं की है। वहीं हिमाचल प्रदेश से महज अनुराग ठाकुर, हरियाणा से राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह और जम्मू-कश्मीर से तारीक अहमद कारा तथा जितेंद्र सिंह ने योजना के दूसरे चरण के लिए गांव की पहचान की है।

गांवों में विकास की ललक पैदा करने के मकसद से पीएम मोदी ने स्वपनिल योजना के तौर पर 11 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरूआत की थी। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के जरिए शुरू की गई इस अनूठी योजना के तहत हर सांसद को अपने क्षेत्र में हर वर्ष एक आदर्श ग्राम चुनकर उसका विकास करना है। पीएम मोदी की प्रेरणा को आगे बढ़ाने के लिए दलगत भावना से उपर उठकर पिछले वर्ष 2015 में लोकसभा के 543 सांसदों में से 499 और राज्यसभा के 252 में से 199 सांसदों ने योजना के प्रथम चरण के तहत अपने क्षेत्र में गांव का चयन कर उसे गोद लिया था। (amarujala)


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