शिलोंग | फ़िलहाल देश में ‘बीफ’ सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है. हर जगह बीफ को लेकर चर्चा हो रही है. अभी हाल ही में मोदी सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर, मारने के मकसद से मवेशियों की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी. मोदी सरकार के इस नोटिफिकेशन के खिलाफ कई राज्य खुलकर आ गये और उन्होंने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया. इनमे केरल और पश्चिम बंगाल शामिल है.

लेकिन सबसे बड़ी बात यह है की मेघालय में खुद बीजेपी नेता भी इस नोटिफिकेशन के खिलाफ खुलकर आ गये है. वहां बीजेपी नेताओ ने लोगो से वादा किया है की अगर राज्य में उनकी सरकार बनी तो वो उन्हें सस्ता बीफ मुहैया कराएँगे. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा की मेघालय में बीफ पर प्रतिबंध नही लगाया जा सकता. उत्तर पूर्व राज्यों में बीजेपी का यह रुख बेहद चौकाने वाला है.

दरअसल मेघालय में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है. ऐसे में मोदी सरकार का यह नोटिफिकेशन बीजेपी की राज्य इकाई के लिए महंगा पड़ सकता है क्योकि उत्तर पूर्व राज्यों में मीट लोगो का दैनिक भोजन माना जाता है. ऐसे में अगर मीट पर प्रतिबंध लगा दिया गया तो वहां जनता बीजेपी के खिलाफ हो सकती है. इसलिए मेघालय में बीजेपी नेता बर्नार्ड मराक ने लोगो से वादा किया की यहाँ मीट पर प्रतिबंध नही लगाया जाएगा.

इसके अलावा मराक ने यह भी वादा किया की उनकी पार्टी सत्ता में आने के बाद बीफ सहित सभी मीट के दाम घटाएगी. उत्तर पूर्व में बीजेपी नेताओं के इस तरह के वादों से AIMIM चीफ असुदुदीन ओवैसी की वो बात सही साबित होती है की बीजेपी के लिए गाय उत्तर में मम्मी में है तो उत्तर पूर्व में यमी. जहाँ बीजेपी नेता हर रैली, हर टीवी डिबेट में अपने आप को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी और हिंदुत्व नेता दिखाने की कोशिश करते है वही उत्तर पूर्व में उनके नेताओं के ये बयान, कही न कही बीजेपी के बीफ को लेकर दोहरे मापदंड को उजागर करती है.


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