मुंबई | नरेन्द्र दामोदर दास मोदी, यह एक ऐसा नाम है जो अचानक से देश की केन्द्रीय राजनीती में उभरकर सामने आया और लोकसभा चुनावो में धुरंधरो को धुल चटाते हुए बीजेपी को बड़ी जीत दिलाई. तीन साल पहले केंद्र में मोदी सरकार का उदय हुआ. इन तीन सालो में नरेन्द्र मोदी एक बड़ा नाम बन चुका है. इतना बड़ा की अब कही पर , कोई भी राजनीतिक समारोह हो, वहां मोदी मोदी के नारे लगने शुरू हो जाते है.

यह बात उनके विरोधियो को काफी सालती है. बात सही भी है , अगर समारोह विपक्षी दल का है तो नारे मोदी के क्यों लगेंगे. लेकिन अब ये नारेबाजी केवल राजनीतिक समारोह में सीमित न होकर उन जगहों पर भी होनी शुरू हो गयी जहाँ मोदी सरकार की आलोचना हो रही हो. जब ऐसा होता है तो लगता है जैसे मोदी सरकार पर सवाल उठाने का अधिकार देश में खत्म हो चुका है. मतलब साफ़ है की बोलना है तो मोदी सरकार के पक्ष में बोलो नही तो चुप रहो.

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नोट बंदी के दौरान इस तरह की घटनाए खूब देखने को मिली. जब कोई भी पत्रकार , नोट बंदी से उपजी समस्याओ को दर्शको के सामने रखने की कोशिश करता तो कही से कुछ लोग आते और मोदी मोदी चिल्लाते हुए पत्रकार की आवाज को चुप करने की कोशिश करते. यह हर बार हुआ जो न एक सरकार के लिए सही है और न ही एक लोकतंत्र के लिए. एक ऐसा ही नजारा बुधवार को बीएमसी के एक कार्यक्रम में देखने को मिला.

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इस कार्यक्रम में शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे भी मौजूद थे. इसी बीच बीजेपी पार्षदों ने मोदी मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए. यह बात शिवसेना के पार्षदों को अच्छी नही लगी. लगेगी भी क्यूँ, आखिर बीएमसी में उनकी सत्ता जो है. लेकिन फिर भी बीजेपी पार्षद लगातार नारे बाजी करते रहे. ऐसे में शिवसेना के पार्षदों ने पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री को ही अपशब्द कहना शुरू कर दिया. उधर मोदी मोदी के नारे लगे तो इधर चोर है, चोर है के नारे.

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अब शिवसेना के पार्षद किसको चोर बता रहे है , यह तो शोध का विषय है. इस पुरे मामले पर उद्धव ठाकरे ने भी कोई प्रतिक्रिया नही दी. उन्होंने मामले से अनजान होने की बात करते हुए कहा की जब उन्हें पूरी जानकरी होगी तो वो इस पर प्रतिक्रिया देंगे. उधर बीजेपी पार्षदों ने शिवसेना के पार्षदों पर मारपीट करने का आरोप लगाया. इसके लिए उन्होंने महानगर पालिका प्रशासन से उस इलाके की सीसीटीवी फुटेज मांगी है जहाँ मारपीट हुई. फुटेज मिलने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज की जाएगी.


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