गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार का शिकार बनी और अपने परिवार के 14 लोगों के कत्ल की चश्मदीद गवाह रही बिलकिस बानो ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरे और परिवार से साथ जो हुआ, उसे भुलाया नहीं जा सकता है, लेकिन मैं इसका बदला नहीं चाहती हूं, बल्कि अपने बच्चों की सुरक्षा और सुकून भरी जिंदगी चाहती हूँ.

बिलकिस बानो ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, मेरे साथ जो हुआ उसे बयां नहीं किया जा सकता, लेकिम उन्हें इस बात का सुकून है कि बंबई हाईकोर्ट ने जुल्म करने वालों को सजा दी और इंसाफ किया. कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है.  पिछले 15 साल तक इंसाफ के लिए लड़ी गई लंबी लड़ाई में उसे आखिर जीत मिली है. इसने देश की ज्युडिशयिरी में भरोसा को बढ़ाया है, लेकिन उन्हें इस बात का थोड़ा मलाल है कि सबूतों को मिटाने में आरोपियों का साथ देने वाले पुलिसकर्मियों और डाक्टरों को दी गई सजा कम है.
बानो और उनके पति याकूब ने कहा कि हम अपनी जिंदगी बिना किसी डर के जीना चाहते हैं. इसके लिए जरूरी है कि दोषियों को परोल नहीं मिलनी चाहिए. यह फैसला हमारे लिए एक नई शुरुआत करने का अवसर है. पिछले 15 वर्षों से हम इस डर के साए में जी रहे हैं. 25 बार रहने का ठिकाना बदल चुके हैं. अपने घर लौट नहीं सके हैं.
गौरतलब रहें कि अहमदाबाद से 250 किमी दूर बसे राधिकापुर गांव में मार्च 2002 को 19 साल की बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था. उस समय वह पांच माह की गर्भवती थी. उन्ही के सामन उन्ही के परिवार के 14 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गयी थी जिसमें दो नवजात शिशु भी शामिल थे.
इस मामलें में बंबई उच्च न्यायालय ने चार मई को निचली अदालत के फैसेल को बरकरार रखते हुए 18 आरोपियों को सजा सुनाई. इनमें से 11 को आजीवन कारावास जबकि साक्ष्यों को मिटाने के आरोप में सात पुलिसकर्मियों और डाक्टरों को बरी किये जाने के अभियोजन पक्ष की अपील को रद्द कर दिया और उन पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया.

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