दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की एक किताब में भगत सिंह को ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ बताये जाने के विवाद पर मशहूर इतिहासकार इरफान हबीब हबीब ने कहा है कि भगत सिंह को ऐसा कहना गलत नहीं है. इरफान हबीब ने ‘इंडिया स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस’ के लेखकों का बचाव किया हैं. इस किताब के हिंदी अनुवाद की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी गयी हैं.

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Irfan-Habib

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान हबीब ने कहा कि भगत सिंह जिस हिंदुस्तान रिपब्लिकन सोशलिस्ट असोसिएशन (HRSA) से संबंध रखते थे उसने खुद 1929 के अपने एक प्रस्ताव में ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल किया है। हबीब ने कहा, ‘वस्तुतः 1929 के लाहौर अधिवेशन के दौरान HRSA के बांटे गए घोषणापत्र में कहा गया था कि आतंकवादी नीतियों की वजह से हमारी आलोचना होती है। लेकिन हम ब्रिटिश आतंक की प्रतिक्रिया में आतंक का सहारा ले रहे हैं।’

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इरफ़ान हबीब ने महात्मा गांधी को दिए गए भगत सिंह के जवाब का उल्लेख किया हैं. भगत सिंह ने अपने जवाब में कहा था कि आतंकवाद खुद में कोई क्रांति नहीं है, लेकिन कोई भी क्रांति आतंक के बिना अधूरी ही है. हबीब के अनुसार भगत सिंह ने आगे चलकर स्वीकार किया था कि शुरुआती दिनों में वह कुछ समय के लिए आतंकवादी ही थे. हबीब ने कहा कि मासूम लोगों की हत्या होने के कारण आतंक शब्द आज अपमानजनक बन गया है.

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