मध्यप्रदेश के बलाघाट के बैहर में 25 सितंबर की रात को आरएसएस के जिला प्रचारक सुरेश यादव से मारपीट के आरोप में एएसपी राजेश शर्मा, टीआई जियाउल हक, एसआई अनिल अजमेरिया समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का प्रयास और लूट की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.

लेकिन अब इस मामले में दूसरा पहलू भी सामने आ रहा हैं जो अब तक छुपाया जा रहा था. इस मामलें में टीआई जियाउल हक को उनके धर्म की वजह से टारगेट किया गया हैं. मुसलमान होने की वजह और मामला राष्ट्रीय स्वयं सेवक से जुड़ा होने के कारण मामले को दूसरा रूप दे दिया गया.

दरअसल आरएसएस के जिला प्रचारक सुरेश यादव ने मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भड़काते हुए वाट्सएप ग्रुप में एक पोस्ट की थी. जिसमे AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को भी निशाना बनाया गया था. इस पोस्ट को लेकर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने सुरेश यादव के खिलाफ ‘धार्मिक भावनाएं भड़काने’ की शिकायत बैहर थाने में की.

शिकायत के बाद टीआई जियाउल हक ने इस मामलें में अपने सीनियर अधिकारीयों को मामलें की पूरी जानकारी देते हुए कहा कि अगर उन्होंने कानून सम्मत कार्रवाई की तो मामला सांप्रदायिक हो जाएगा. क्योंकि उनकों पता था कि उन्हें उनके धर्म की वजह से निशाना बनाया जाएगा.

सीनियर अधिकारीयों के निर्देश पर उन्होंने इलाके में शांति बनाये रखने के लिए सुरेश यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया. मामला दर्ज होने के बाद सीनियर अधिकारीयों ने टीआई जियाउल हक को सुरेश यादव को गिरफ़्तार करने के आदेश दिए. लेकिन सुरेश यादव की गिरफ्तारी के दौरान जियाउल हक ने पुलिस टीम को लीड करने से इंकार करते हुए कहा कि अगर उन्होंने सुरेश यादव को गिरफ्तार किया तो मामला सांप्रदायिक बन जाएगा.

वरिष्ठ अधिकारियों ने जियाउल हक की समझदारी पर एडिशनल एसपी राजेश शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम को सुरेश यादव को गिरफ़्तार करने के लिए भेजा. इस टीम में थाने का टीआई होने के कारण जियाउल हक को भी शामिल होना पड़ा. पुलिस टीम सुरेश यादव को गिरफ्तार कर थाने ले आई. इस दौरान कोई विवाद नहीं हुआ. भगवा संगठनों ने भी भड़काऊ पोस्ट होने के कारण कोई विरोध नहीं किया.

थाने में पहुँचने के बाद सुरेश यादव ने अपनी राजनीतिक ताकत के दम पर पुलिस को गालियां देना शुरू कर दिया और उनकी वर्दी उतरवाने की धमकी दी. लेकिन पुलिस अपनी कारवाई में लगी रही. इसी दौरान मौका पाकर सुरेश यादव थाने से भाग निकला और समाने स्थित एक मेडिकल स्टोर में घुस गया. दोबारा पकड़ने के दौरान उसने पुलिस के साथ मारपीट शुरू कर दी जिसमे उसे भी कई चौटे आई. पुलिस ने उसे एक बार फिर पकड़कर बंद कर दिया.

मारपीट की खबर फैलते ही अगले दिन भगवा संगठनों ने मामलें को सांप्रदायिक बनाते हुए पुलिस के खिलाफ मौर्चा खोल दिया और मुस्लिम होने की वजह से टीआई जियाउल हक को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया. जिसके बाद तुरंत ही एडिशनल एसपी राजेश शर्मा, टीआई जियाउल हक, एसआई अनिल अजमेरिया समेत कुल छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी कर दिया गया. RSS के दबाव में आननफानन में भोपाल पीएचक्यू से एक एसआईटी भी गठित कर दी गई. और इन सभी के खिलाफ हत्या के प्रयास और लुट की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए.

इस घटना के बाद पुरे पुलिस महकमे में बवाल मचा हुआ हैं. पुलिस अधिकारीयों ने सरकार के खिलाफ मौर्चा खोल दिया हैं. जिस तरह सरकार ने संघ के दबाव में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसा मामला दर्ज कर उन्हें कसूरवार ठहराने की कोशिश की. पुलिस महकमेने  सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने का मन बना लिया है.


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