रूडकी | आजकल के महंगाई के दौर में जब आपको घर की ईएम्आई भी देनी होती है तो आप चाहते है की मकान का एक भाग किराये पर देकर आप कुछ कमाई कर ले. ताकि आपकी ईएम्आई का बोझ कुछ कम हो सके. परन्तु बिना सोचा समझे किसी को भी किराए पर मकान देना आपके लिए बहुत भारी सिद्ध हो सकता है. इसलिए जरुरी है की किसी को भी मकान किराए पर देने से पहले आप निम्नलिखित सावधानिया बरते-:

  1. किराए पर मकान केवल जानने वाले के माध्यम से ही दे.
  2. मकान किराये पर देने से पहले यह अच्छे से पड़ताल कर ले की वह व्यक्ति क्या करता है तथा क्या वह समय से किराया दे पायेगा? क्योकि आख़िरकार आप अन्य आमदनी के लिए मकान किराए पर दे रहे है.
  3. जहाँ वह व्यक्ति पहले से किराये पर रहता है वहां जाकर यह अवश्य पता करे की उस व्यक्ति का स्वाभाव कैसा है तथा उसका पुराना मकान छोड़ने का क्या कारण है?
  4. उस व्यक्ति का पुलिस वेरिफिकेशन व् रेंट अग्रीमेंट जरुर कराये.
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यदि आप उक्त बातो का ध्यान रखेंगे तो अपनी गाढ़ी पसीने की कमाई से लिया गये मकान पर बेवजह के विवाद एवं कब्जे से बच सकेंगे. अभी हाल ही में रूडकी में रहने वाले एक व्यक्ति हिमांशु गुप्ता ने अपना अनुभव हमसे साझा किया. हिमांशु गुप्ता ने लगभग दो साल पहले रूडकी के आवास विकास कॉलोनी में करीब 20 लाख रूपए का 15 साल के लिए लोन लेकर एक घर ख़रीदा था. जिसकी महीने की किश्त करीब 24 हजार रूपए जाती है.

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इस किश्त का बोझ थोडा कम करने के लिए उन्होंने इस घर का उपरी भाग 3800 रूपए प्रति माह किराये पर दिया था. उन्होंने किरायदार को केवल 11 महीने के लिए यह मकान किराये पर दिया था. जिसका एक अग्रीमेंट भी बनवाया गया. परन्तु अग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी न तो किरायेदार मकान खाली करने के लिए तैयार है और उसने किराया एवं बिजली का बिल भी देना बंद कर दिया है. खुद को शिवसेना का नेता बताने वाला यह शख्स पुलिस वालो से भी जान पहचान होने की धमकी देता है.

कई बार आग्रह करने के बाद भी वह मकान खाली करने में आना कानी कर रहा है. यहाँ तक की हिमांशु गुप्ता की तरफ से यह भी पेशकश की गयी जो किराया और बिजली का बिल उसके ऊपर बकाया है वह उनको नही चाहिए बस वो मकान खाली कर वहां से चले जाए. करीब 4 महीने की मसक्कत के बाद भी वह मकान खाली नही हो पाया है.

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इस प्रकार के हजारो केस आम तौर पर देखने को मिल जाते है. अतः अपने खून पसीने की कमाई से ली गयी संपत्ति को बचाने के लिए थोड़ी सावधानी बरतनी आवश्यक है. नही तो हिमांशु गुप्ता की तरह आपको भी काफी परेशानी उठानी पड़ सकती है. क्योकि अगर ऐसे मामले कोर्ट कचहरी में चले गए तो इनका निपटारा होने में कई साल लग जाते है.


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