कोलकाता | अपने विवादित और बडबोले बोल के लिए चर्चा में रहने वाले शाही इमाम नूर-उर-रहमान बरकती को टीपू सुल्तान के शाही इमाम पद से हटा दिया गया है. वक्फ बोर्ड ने इस बारे में एक नोटिस जारी कर बरकती को कार्यालय खाली करने का निर्देश दिया गया है. हालाँकि बरकती ने बोर्ड के फैसले को मानने से इनकार करते हुए कहा की उन्हें मुझे पद से हटाने का अधिकार नही है.

प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस पर अपने तीखे बोल के लिए प्रसिद्ध बरकती पर वक्फ बोर्ड ने आरोप लगाया ही की उन्होंने अपने राजनितिक और वित्तीय फायदे के लिए मस्जिद का इस्तेमाल किया है. प्रिंस गुलाम अहमद वक्फ एस्टेट ट्रस्टी आरिफ अहमद ने वक्फ के फैसले की जानकारी देते हुए कहा की हमने उन्हें हटाने का नोटिस भेजा है. हम पहले भी उन्हें उनकी गतिविधियों और बयानों के लिए आगाह कर चुके थे लेकिन वो नही माने.

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आरिफ अहमद ने आगे कहा की एक धार्मिक व्यक्ति होने के नाते उन्होंने अपनी हदे पार की है. हम कभी भी यह उम्मीद नही करते की एक इमाम अपने पद का इस तरीके से दुरूपयोग करेगा. उन्होंने देश के नेताओं के प्रति काफी असम्मान जताया है. उन्होंने अपने फायदे के लिए लोगो को भड़काने का काम किया है. वो लगातार राष्ट्रविरोधी बयान देते रहे जिसकी वजह से उन्हें मस्जिद के शाही इमाम पद से हटाया गया.

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किसी राजनितिक दबाव में हटाने के सवाल पर उन्होंने कहा की हमारे ऊपर ऐसा कोई दबाव नही है. बरकती द्वारा वक्फ का आदेश नही मानने पर आरिफ ने कहा की ऐसी स्थिति में हम कोर्ट का दरवाजा खट खटाएंगे. उधर वक्फ के फैसले पर बरकती ने कहा की उनके पास मुझे हटाने के अधिकार नही है. केवल मुस्लिम समुदाय मुझे मेरे पद से हटा सकता है. मैं अभी भी मस्जिद का शाही इमाम हूँ. मैं जानता हूँ की एक उर्दू अख़बार और तृणमूल के कुछ सासंद मेरे खिलाफ साजिश रच रहे है. वो वक्फ की संपत्ति पर कब्ज़ा करना चाहते है.

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