कोलकाता | पश्चिम बंगाल में पिछले कई महीनो से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच जबरदस्त तनाव चल रहा है. कई बार यह तनाव हिंसा का रूप भी ले चूका है. बीजेपी लगातार ममता सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीती करने का आरोप लगाती आई है जबकि ममता, आरएसएस और बीजेपी पर सूबे की आबो हवा खराबा करने का आरोप लगा रही है.

इसी बीच टीपू सुलतान मसजिद के शाही इमाम मौलाना सैयद नुरूर रहमान बरकती के एक बयान से एक बार फिर दोनों दलों के बीच वाक् युद्ध शुरू हो गया है. मौलाना बरकती ने बीजेपी का समर्थन करने वाले सभी मुस्लिमो को हिजड़े की संज्ञा देते हुए फतवा जारी किया था की जो भी मुसलमान, बीजेपी या आरएसएस का समर्थन करेगा उसकी पिटाई की जायेगी और उसको समुदाय से बाहर कर दिया जायेगा.

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दरअसल यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब मौलाना बरकती एक कार्यक्रम में लाल बत्ती लगी गाड़ी से पहुंचे. जब पत्रकारों ने उनसे पुछा की जब एक मई से लाल बत्ती पर प्रतिबंध लग चूका है फिर आपने अभी तक लाल बत्ती क्यों नही हटाई है. इस पर मौलाना ने जवाब दिया की मैं केंद्र सरकार के किसी आदेश को नही मानता क्योकि यहाँ ब्रिटिश सरकार का कानून है और पहले इस बदला जाए तब मैं लाल बत्ती हटाऊंगा.

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यही नही मौलाना बरकती ने यह भी कहा की उनको ममता बनर्जी ने लाल बत्ती लगाने की इजाजत दी है. मौलाना के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने कहा की उनका यह बयान दर्शाता है की बंगाल में सरकार कैसे चल रही है. यहाँ के केवल तुष्टिकरण की राजनीती हो रही है. यह सब बिना तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की इजाजत के बिना नही हो रहा है. सब ममता बनर्जी के इशारो पर हो रहा है. यह पहली बार नही है जब वो ऐसा बयान दे रहे है. वो तो प्रधानमंत्री के खिलाफ भी फतवा जारी कर चुके है.

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