प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की उच्च परंपराओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की उच्च परंपराओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान को खत्म की साजिश है जिसकी वह निंदा करते हैं। अग्निवेश ने सोमवार यहां संवाददताओं से कहा, ‘आरएसएस, एबीवीपी और भाजपा के गैर जिम्मेदार नेताओं द्वारा जेएनयू की उच्च परंपराओं को बदनाम करने की कोशिश हो रही है, मैं इसकी निंदा करता हूं। आप एक विश्वविद्यालय की हत्या करने की साजिश कर रहे हैं। क्योंकि आपका एबीवीपी वहां पर जेएनयू छात्र संगठन के अध्यक्ष कन्हैया कुमार से हार गया। यह गलत बात है। राजनीति में इतनी गंदी हरकत नहीं होनी चाहिए।’

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उन्होंने कहा, ‘हैदराबाद सेंट्रल विवि का कांड जेएनयू में रिपीट हो रहा है। बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है कि शिक्षण और फिल्म संस्थाओं में भाजपा को आरएसएस के लोगों को घुसाने की जल्दी की जा रही है ताकि उनसे अपने हित साधे जा सके। यह भारत की बौद्धिक विरासत पर बड़ा हमला है। हम सब को इससे सावधान रहना होगा।’

उन्होंने स्पष्ट किया कि जेएनयू में कथित भारत विरोधी नारेबाजी की घटना का वह भी विरोध करते हैं लेकिन जेएनयू विवि के कुलपति द्वारा गठित जांच की रिपोर्ट आने के पहले ही आरोपी छात्र नेता को पुलिस को सौंपा जाना गलत है। उन्होंने कहा कि मामले की पूरी जांच के बाद ही आरोपी छात्रों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

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अग्निवेश ने कहा कि यदि जेएनयू के कुछ विद्यार्थियों ने अफजल गुरू के पक्ष में कोई बात कही है, तो इससे पहले कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और उनकी बेटी महबूबा सहित उनकी पार्टी पीडीपी भी अफजल को अपना हीरो बताती रहीं हैं, लेकिन वहां भाजपा ने उनसे समझौता कर कश्मीर में सरकार बनाई। उन्होंने कहा कि इस हिसाब से तो भाजपा और पीडीपी नेताओं पर भी देशद्रोह का मामला कायम होना चाहिए।

दिल्ली की आप सरकार के संबंध में उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की तुलना में आप सरकार ने एक साल के दौरान अच्छा काम किया है तथा भष्ट्राचार पर भी अंकुश लगा है। मगर वह जन अपेक्षाओं के मुताबिक ताकतवर विकल्प बनती नहीं दिख रही है। बंधुआ मजदूर खत्म हो- वर्ष 1976 में बंधुआ मजदूरी विरोधी कानून बनने के बाद भी मध्यप्रदेश में सरकार की नाक के नीचे गुलामी प्रथा चल रही है।

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लोग अपनी ही जमीन पर पीढ़ी दर पीढ़ी गुलामी कर रहे हैं। साहूकारों द्वारा कर्ज पर 15 से 20 फीसद पर ब्याज वसूला जा रहा है और बंधुआ मजदूर 20-25 साल से परिवार सहित उनके अधीन काम कर रहे हैं। आजादी के 70 साल बाद और वर्ष 1976 में बंधुआ मजदूरी के खिलाफ कानून बनने के बाद सरकार की यह जिम्मेदारी है कि किसी भी प्रथा के नाम पर चल रही बंधुआ मजदूरी देश से खत्म होनी चाहिए। (Jansatta)


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