अल्पसंख्यक और मानवाधिकार एनजीओ कैथलिक सेक्युलर फोरम (सीएसएफ) ने कहा है कि देश में पिछले साल ईसाई समुदाय के खिलाफ अप्रत्याशित तौर पर असहिष्णुता बढ़ी है। इसके लिए एनजीओ ने 2015 में 20 राज्यों में ईसाइयों के कथित उत्पीड़न की 85 बड़ी घटनाओं को गिनाते हुए एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल औसतन भारत में हर दिन ईसाइयों के खिलाफ हेट क्राइम का ऐसा एक मामला देखने को मिला।

सीएसएफ के महासचिव जोसेफ डी ने कहा है कि 2014 के मुकाबले पिछले साल ऐसी घटनाओं में 20 फीसदी का इजाफा हुआ। उन्होंने कहा, ‘असल संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लोग पुलिस फोर्स के सांप्रदायिक होने की वजह से ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते हैं।’

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हिंसा
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हिंसा देखने को मिली है। इसके बाद तेलंगाना और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है। इसमें महाराष्ट्र को ‘हिंदुत्व की नई राजधानी’ कहा गया है। इस रिपोर्ट में दिल्ली का नंबर भी टॉप 10 राज्यों में है, जहां 5 कैथलिक चर्चों को नुकसान पहुंचाया गया और एक पुजारी और समुदाय के सदस्यों पर हमले हुए।

सीएसएफ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 2015 में कम से कम 7 पास्टर की हत्या हुई और 8 हजार ईसाइयों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में 2011 की जनगणना के हवाले से कई राज्यों की ऐसी घटनाओं का जिक्र किया गया है। इसमें अरुणाचल प्रदेश में संदिग्ध कट्टर हिंदूवादी तत्वों का ईसाइयों पर हमले की कोशिश से लेकर छत्तीसगढ़ में हिंदू धर्म के अलावा दूसरे धर्मों की गतिविधियों पर कथित बैन, हिमाचल प्रदेश में CPWD द्वारा शिमला सीएनआई चर्च को सरकारी संपत्ति बताया जाना और तमिलनाडु में धार्मिक तनाव फैलाने के लिए बाइबल को सड़कों पर फेंके जाने का जिक्र किया गया है।

हिंदुत्व की विचारधारा में उभार
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 में हिंदुत्व की विचारधारा में अहम उभार देखने को मिला। इसमें कहा गया है कि आरएसएस और इसकी विचारधारा से जुड़े 38 संगठनों की गतिविधियां बढ़ी हैं और वे ‘देश की राजनीति में पकड़ बनाने के लिए तैयारी कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘बीजेपी के केंद्र में होने से आरएसएस की शाखाओं में काफी इजाफा हुआ है। केरल में बीजेपी की सरकार नहीं होने के बावजूद वहां सबसे ज्यादा शाखाएं हैं। पूर्वोत्तर, तमिलनाडु, केरल और गोवा में सेक्युलर संस्थाओं का भगवाकरण किया जा रहा है।’

हिंदुत्व की नई राजधानी महाराष्ट्र

उन्होंने आगे कहा, ‘पहले हिंदुत्व की राजधानी गुजरात थी, अब महाराष्ट्र हो गई है। आरएसएस की अब तक की सबसे बड़ी रैली पुणे में हुई, जिसमें 1.5 लाख लोग शामिल हुए। नरेंद्र दाभोलकर जैसे तर्कवादियों को धमकी मिल रही है। महाराष्ट्र विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी बिल पेश किया गया है। कोई नरेंद्र महाराज हैं, जिनका दावा है कि उन्होंने 2015 में 2 हजार ईसाइयों को हिंदू धर्म में शामिल किया। इसका मुख्यालय भी महाराष्ट्र में है। भगवा आतंकी हमलों की जड़ें भी महाराष्ट्र में ही हैं।’ साभार: नवभारत टाइम्स

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