modi in Brussels

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति औद्योगिक केंद्र का लोर्कापण करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विभिन्न भागों में दलितों और आदिवासी लोगों पर होने वाली अत्याचार की घटनाओं से मेरा माथा शर्म से झुक जाता है.

उन्होंने गुरू गोविंद सिंह का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘हम जानते हैं कि हमारी सामाजिक विसंगतियों के कारण आज भी हमारे दलित भाइयों को निशाना बनाने की कुछ घटनाएं सुनने में आती हैं जिनसे मेरा सिर शर्म से झुक जाता है. आजादी के 70 साल बाद हम और इंतजार नहीं कर सकते.’

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उन्होंने कहा कि दलित और आदिवासी युवाओं और महिलाओं में भी अन्य लोगों की तरह आकांक्षाएं हैं और उनमें क्षमता हैं. सरकार ने उन्हें अवसर उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं शुरू की है. इसके लिए उन्होंने दलित चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री का उल्लेख किया. इसमे कई ऐसे दलित उद्यमी शामिल हैं जिनका कारोबार 500 करोड रुपए सालाना है.

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उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए हब से दलितों और आदिवासियों को उद्यमी बनने में मदद मिलेगी ताकि वे दूसरों को रोजगार दे सकें. मोदी ने कहा, ‘‘मैंने राज्य सरकारों से अनुरोध किया है कि मंत्रालय द्वारा की गयी खरीद में चार प्रतिशत दलितों के उत्पादन वाली वस्तुएं होनी चाहिए ताकि उनका प्रोत्साहन हो.


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