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नई दिल्ली | केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोट बंदी के बाद कुछ मीडिया कवरेजो पर सवाल उठाये है. अरुण जेटली ने कहा की कुछ टीवी के मित्र केवल नोट बंदी की पीड़ा दिखा रहे है इसका उद्देश्य नही दिखा रही है. वित्त मंत्री जी का इशारा उन मीडिया रिपोर्ट्स की और था जिनमे नोट बंदी के बाद बैंकों और एटीएम के सामने कतारों में लगे लोगो की परेशानियों की कवरेज दिखाई गयी.

मेक इन उड़ीसा कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा की हर फैसले के कुछ उद्देश्य होते है और इनको लागू करने के बाद कुछ पीड़ा भी जरुर होती है. ऐसे में हमारे टीवी वाले मित्र केवल पीड़ा को दिखाते है इसके पीछे के उद्देश्य को नही. मैं सोचता हूँ और अपने दोस्तों से बात भी करता हूँ की 15 अगस्त 1947 को जब हम आजाद हुए थे तब दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या भी इधर से उधर हुई थी.

अरुण जेटली ने आगे कहा की आजादी मिलने में भी एक पीड़ा थी. लाखो शरणार्थी इधर से उधर हुए, लाखो लोग मारे गए, ऐसे में अगर हमारे 24 घंटे चलने वाले यह चैनल होते तो वो क्या दिखाते , आजादी का जश्न या पीड़ा. नोट बंदी का फैसला कितना कठिन था, कैसे कैसे लोगो के खिलाफ फैसला लेना कितना कठिन था, इस फैसले को गुप्त रखना कितना कठिन था, लेकिन फिर भी इस सरकार ने, हमारे प्रधानमंत्री ने देश का अब तक सबसे कठिन फैसला लेना का निर्णय लिया.

अरुण जेटली ने नोट बंदी का उद्देश्य बताते हुए कहा की इससे सबसे ज्यादा अगर किसी का फायदा होगा तो वो है गरीब. सिस्टम में ज्यादा पैसा आएगा तो गरीबो के उत्थान के लिए और योजनाये चलायी जा सकेगी. इससे जीडीपी में उछाल आएगा, इसके दीर्घकालिक फायदे जल्द ही दिखने शुरू हो जायेंगे. नोट बंदी और जीएसटी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित होंगे.


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