नई दिल्ली. दिल्ली में हुए तीन दिवसीय आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रम पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती श्री श्री रविशंकर को अपने निशाने पर लिया है। उनका कहना है कि श्री श्री का दिल्ली में यमुना किनारे कार्यक्रम एक दिखावा था। हम नदी में फूल डालने को भी गलत मानते हैं और आप इतनी ज्यादा तादाद में मैला यमुना जी में मिला रहे हो। उन्होंने (श्री श्री) तीन दिन में यमुना जितनी गंदी की है, उसे कई सालों तक साफ नहीं किया जा सकेगा।

श्री श्री ने 3 दिन में इतनी गंदगी फैलाई कि बरसों तक साफ नहीं होगी यमुना- शंकराचार्य

शंकराचार्य ने कहा कि वह शख्स भारतीय संस्कृति नहीं बल्कि सिर्फ संगीत सिखाता है। इससे किसी का भला नहीं होने वाला है। प्रधानमंत्री को उस कार्यक्रम में जाने की जरूरत नहीं थी।
वहां जाकर उन्होंने कुछ खास नहीं बोला। वह भी आर्ट दिखाकर आ गए। शंकराचार्य चार दिन से भोपाल प्रवास पर थे। इस बीच, शंकराचार्य से झरनेश्वर महादेव मंदिर में जाकर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मुलाकात की और उन्हें सिंहस्थ में आने का न्योता दिया।
शंकराचार्य ने रविशंकर की निजी रूप से भी खिंचाई की। उन्होंने कहा,रविशंकर लंबे कुर्ते पहनते हैं, जिसका आधा हिस्सा जमीन पर रहता है। उसे कई लोग संभालते हैं। उन पर फूल बरसाते हैं। उन्होंने अपने बाल काले कर रखे हैं। यह जीने की कला नहीं है।उन्होंने कहा हर चीज में आर्ट घुसाना सही नहीं है। जिसे व्यापार में घाटा हुआ हो,
जिसका कोई करीबी दुनिया छोड़ गया हो, वह संगीत से खुश नहीं हो सकता। उसका जीवन अध्यात्म ही बेहतर कर सकता है। रविशंकर जिस भारतीय संस्कृति की बात कर रहे हैं, उसे कोई गोमांस छोड़े बिना कैसे सीख सकता है। अगर कोई गोमांस खाना नहीं छोड़ेगा, तो वह योग का सही अभ्यास नहीं कर सकता है। (newspoint360)

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