सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग ने बुधवार को कहा कि भारतीय सेना उसे सौंपे जाने वाले किसी भी कार्य को करने के लिए तैयार है और उसे अंजाम देने में सक्षम है।

सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग ने बुधवार को कहा कि भारतीय सेना उसे सौंपे जाने वाले किसी भी कार्य को करने के लिए तैयार है और उसे अंजाम देने में सक्षम है। उनका यह बयान रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की दो दिन पहले की गई उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों ने भारत को दर्द दिया है उन्हें उसी तरह से जवाब देने की आवश्यकता है। सुहाग से यह पूछे जाने पर कि क्या सेना पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी शिविरों के खिलाफ गुप्त या चुनिंदा हमला करने के लिए तैयार है

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय सेना उसे दिए जाने वाले किसी भी कार्य को करने को तैयार और सक्षम है।’’ उन्होंने कहा कि सेना देश के समक्ष किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सेना प्रमुख ने कहा कि देश के समक्ष सुरक्षा वातावरण अधिक जटिल और गतिशील बन रहा है और कम से कम 17 आतंकी प्रशिक्षण शिविर पाक अधिकृत कश्मीर में अब भी सक्रिय हैं। पहले 42 शिविर चल रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ शिविरों को अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से कुछ साल पहले बंद कर दिया गया था। उन्होंने पर्रिकर द्वारा दिए गए उस बयान पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया जिसमें उन्होंने जोर दिया था कि आतंकवादी हमलों के कारण भारत को जो दर्द दिया गया है उसे वापस लौटाये जाने की आवश्यकता है।

सेना प्रमुख सेना दिवस से पहले यहां अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पाकिस्तान से लगी सीमा से पंजाब में अतिक्रमण पर चिंता जताई और साफ कर दिया कि इसकी जिम्मेदारी बीएसएफ पर है क्योंकि वह इलाके की सुरक्षा में तैनात है। सुहाग ने इस बात का भी संकेत दिया कि छह पाकिस्तानी आतंकवादी पठानकोट वायु सेना ठिकाने में पहले से छिपे रहे हों क्योंकि 24 किलोमीटर की परिधि वाली दीवार के पास सेना का घेरा लगाए जाने के बाद कोई भी अंदर नहीं आया। सुहाग ने कहा कि अगर आतंकवादियों ने स्थानीय मदद से मादक पदार्थो के तस्करों के रास्ते का इस्तेमाल भीतर आने के लिए किया है तो यह देश्रदोह का मामला है।

सेना प्रमुख ने हमले का जवाब देने में समन्वय के अभाव के आरोपों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ‘पूरा तालमेल’ था। हमले में पाकिस्तान की भूमिका पर सुहाग ने कहा कि उनके द्वारा ली गई दवाओं पर मार्किंग के साथ उनके कुछ उपकरण दर्शाते हैं कि वे पाकिस्तान से हैं। उन्होंने कहा कि साक्ष्य को पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ साझा किया गया है लेकिन एनआईए द्वारा जांच के बाद ही ब्यौरा आएगा। जनरल ने कहा कि पठानकोट आतंकी हमले का मकसद अधिकतम क्षति पहुंचाना और मीडिया में सुर्खियां बटोरना था। यह पूछे जाने पर कि क्या वह महसूस करते हैं कि पठानकोट हमला शांति प्रक्रिया को बाधित करने के लिए पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का प्रयास था तो उन्होंने कहा, ‘‘उसने ऐसा कई बार किया है। मैं इसके (पठानकोट के) संबंध में नहीं कह रहा हूं।’’ साभार: जनसत्ता


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