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जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार को खरी-खरी सुनाई हैं.

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देशभर के हाईकोर्ट्स में लगभग 500 जजों के पद खाली पड़े हैं. कोर्ट रूम तो है लेकिन न वहां किसी मुक़दमे की सुनवाई हो रही है और न ही कोई जज है. उन्होंने आगे कहा, सरकार जजों की नियुक्ति नहीं कर रही है. मैंने पूर्व में भी सरकार को लिखा है कि जब तक आप नियमों में बदलाव नहीं कर देते, तब तक हाईकोर्टों के जजों को भी नियुक्ति का अधिकार दे दें.

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टीएस ठाकुर ने कहा कि जजों की नियुक्ति हुई है, लेकिन बड़ी संख्या में दिए गए प्रस्ताव अभी भी पेंडिंग में है. चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज रिटायर्ड होने के बाद किसी भी ट्रिब्यूनल का हेड बनने को तैयार नहीं हैं क्योंकि सरकार उन्हें मूलभूत सुविधा के नाम पर एक आवास भी मुहैया नहीं करवा पा रही है.

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उन्होंने कहा कि नए ट्रिब्यूनल बनाए जाने से न्यायपालिका को कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि वे अदालतों का बोझ कम करते हैं, लेकिन इनमें मूलभूत सुविधाएं तो होनी ही चाहिए. ठाकुर ने कहा, ‘विभिन्न न्यायाधिकरणों में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधी नियमों में संशोधन की आवश्यकता है ताकि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी इन पदों के योग्य हो सकें.’


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