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देशभर के उच्च नय्यालयों में जजों की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर कोलिजियम की सिफारिशों के बाद जजों की नियुक्ति क्‍यों नही की जा रही है? कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आप पूरे संस्थान (न्यायपालिका) को काम करने से पूरी तरह से नहीं रोक सकते.

प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रशासनिक उदासीनता इस संस्थान को खराब कर रही है. आज हालात ये हैं कि कोर्ट को ताला लगाना पड़ा है. कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट में पूरा ग्राउंड फ्लोर बंद है. क्यों ना पूरे संस्थान को ताला लगा दिया जाए और लोगों को न्याय देना बंद कर दिया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जजों की नियुक्ति को अटकाया नहीं जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती है और इस सवैंधानिक संस्‍था के काम-काज को रोक नहीं सकते हैं.

चीफ जस्टिस ठाकुर ने कहा, हम बड़े सब्र से काम कर रहे हैं. केंद्र सरकार बताए कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों की सूची का क्या हुआ. सरकार 9 महीने से इस सूची पर क्यों बैठी है? अगर सरकार को इन नामों पर कोई दिक्कत है तो हमें भेजें, फिर से विचार करेंगे.

सीजेआई ने ये भी कहा कि ऐसा ही रवैया रहा तो सेकेट्री जस्टिस और पीएमओ सेकेट्री को कोर्ट में बुला लेंगे. सीजेआई ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में 160 में से 77 जज काम कर रहे हैं जबकि छतीसगढ़ में 22 में से 8 जज काम कर रहे हैं.


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