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नई दिल्ली | मशहूर अर्थशास्त्री और भारत रत्न अमर्त्य सेन ने नोट बंदी के फैसले को निरंकुश और अमानवीय करार दिया है. अमर्त्य सेन ने कहा है की नोट बंदी से फायदा कम होगा लेकिन इससे तकलीफे ज्यादा होंगी. हालांकि अमर्त्य सेन ने कालेधन को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री की मंशा पर सवाल नही उठाये. उन्होंने कहा की अगर उनकी मंशा सही भी है तब भी यह कदम अविश्वास पैदा करने वाला है.

एनडीटीवी से बात करते हुए अमर्त्य सेन ने कहा की देश में कोई भी ऐसा नही होगा जो कालेधन को समाप्त नही करना चाहेगा. हम सब चाहते है की देश से कालाधन खत्म हो. इसलिए अगर कोई भी ऐसा कदम उठाया जाता है जो कालेधन को खत्म करे , उसकी सब भारतीय प्रशंसा करेंगे. लेकिन हमें देखना होगा की जो कदम उठाया जा रहा है वो सही है या नही? नोट बंदी से केवल नुक्सान ही होगा, फायदे न के बराबर है.

अमर्त्य सेन ने कहा की नोट बंदी कालेधन से निपटने के लिए समझधारी भरा कदम नही है. नोट बंदी से लोगो को हो रही परेशानी पर बोलते हुए अमर्त्य सेन ने कहा की कोई भी कालाधन नकद में बहुत कम रखता है. देश में केवल 6 फीसदी ही कालाधन कैश में है. नोट बंदी उपलब्धि के हिसाब से छोटा कदम है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था को नुक्सान पहुँचाने के लिए काफी बड़ा. इसलिए हम ऐसा कदम नही उठा सकते जो मानवता को नुक्सान पहुंचाता है.

इस आर्थिक नीति को मिल रही दोनों तरह की प्रतिक्रिया के बारे में बोलते हुए अमर्त्य सेन ने कहा की मैं इसे निरंकुश कदम कहूँगा क्योकि इससे मुद्रा में भरोसा टूटता है. क्योकि रुपया प्रोमिसरी नोट है. इसलिए किसी भी सरकार के लिए इसे नकार देना मूल वादे से फिर जाने जैसा है. क्योकि अगर कोई यह कह दे की हम इसकी अदायगी नही करेंगे तो यह निरंकुश ही है.

अमर्त्य सेन ने आगे कहा की सरकार ऐसा आपके खातो के साथ भी कर सकती है. सरकार कल कह सकती है की आप अपने खातो से एक निश्चित राशी से ज्यादा निकासी पर रोक लगा सकती है. आप तब ही अपने पैसे निकाल सकते है जब आप साबित कर दें की यह रकम किस स्रोत से कमाई गयी है. विरोधियो को राष्ट्र विरोधी बताने पर अमर्त्य सेन ने कहा की 31 फीसदी वोट मिल जाने का मतलब यह नही है की बीजेपी को लाइसेंस मिल गया की वो उनसे सवाल करने वालो को राष्ट्र विरोधी करार दे.


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