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वैश्विक मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि पेलेट गन के कारण कारण कश्मीर घाटी में विरोध प्रदर्शनों में मौतें हुईं हैं और सैकड़ों लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है.

‘एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया’ के वरिष्ठ अभियान संचालक जहूर वानी ने एक बयान में कहा, ‘पैलेट गन का इस्तेमाल स्वाभाविक रूप से गलत और विवेकहीन है और कानून प्रवर्तन में इनकी कोई जगह नहीं है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया’ जम्मू एवं कश्मीर सरकार से विरोध प्रदर्शनों के नियत्रंण में पैलेट गन का इस्तेमाल तत्काल रोकने की मांग करती है.’

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एमनेस्टी इंटरनेशनल के बयान के अनुसार, ‘इनसे सही निशाना सुनिश्चित नहीं किया जा सकता और इनके कारण पास खड़े लोगों या ऐसे प्रदर्शकारियों को गंभीर चोट पहुंच सकती है जो हिंसा में शामिल नहीं हैं. इन खतरों को नियंत्रित करना लगभग असंभव है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पेलेट गन को ऐसा ‘कम घातक हथियार’ कहा है, जिसके ‘घातक परिणाम’ होते हैं. प्रशासन ने पैलेट गन को ‘गैर घातक’ हथियार करार दिया हुआ है. बयान के मुताबिक, ‘जम्मू एवं कश्मीर में पैलेट गन से लगी चोट के कारण तीसरे व्यक्ति की मौत इस बात की सूचक है कि इस ‘कम घातक हथियार’ के ‘घातक परिणाम’ हो सकते हैं.’

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श्रीनगर के 23 वर्षीय रियाज अहमद शाह की बुधवार को पैलेट गन के कारण हुई मौत को लेकर एमनेस्टी ने कहा,  ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, रियाज को नजदीक से गोली मारी गई थी और उसके महत्वपूर्ण अंगों को क्षति पहुंची थी. राज्य पुलिस ने अज्ञात सुरक्षाकर्मी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है.


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