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भोपाल में सिमी कार्यकर्ताओं के कथित एनकाउंटर को लेकर उठ रहें सवालों पर शिवराज सरकार ने ख़ामोशी इख्तियार कर ली हैं. वहीँ दूसरी तरफ उठते हुए सवालों का दायरा बढता जा रहा हैं. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जस्टिस मार्कंडेय काटजू द्वारा एनकाउंटर को फर्जी बताने के बाद इस एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग उठ रही हैं.

वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा, ‘‘सिमी कार्यकर्ता अत्यंत सुरक्षा वाली जेल से भाग गये और कुछ घंटे के अंदर उन्हें न केवल खोज लिया गया बल्कि मार दिया गया. अब उनसे पूछताछ नहीं की जा सकती, कोई सबूत नहीं है, उनके बयान रिकॉर्ड नहीं किये जा सकते.’  उन्होंने आगे कहा, ‘‘मैं न्यायिक जांच की मांग कर रहा हूं. सरकार को भी पता चलना चाहिए कि वे किन परिस्थितियों में भागे.’

वहीँ कांग्रेस नेता मोहन प्रकाश ने इस मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से इन इनकाउंटर के संबंध में पूछा जाना चाहिए, क्योंकि वे इसके ‘एक्सपर्ट’ हैं.

इसके अलावा चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी विधायक अलका लांबा ने भी कहा कि सभी आठ आतंकी एक ही जगह पर मार गिराया जा सकते हैं? उन्होंने कहा कि आतंकी मारे गए, अच्छा हुआ. 8 आतंकियों का एक साथ भागना, फिर कुछ घंटों बाद एक ही साथ एनकाउंटर में मारे जाना. सरकार के पास ‘व्यापम’ फॉर्मूला भी था.

माकपा नेता, बृंदा करात ने कहा, ‘पुलिस और सरकार के बयानों में विरोधाभास है. इसलिए सच जानने के लिए हाईकोर्ट के जज की निगरानी में एक निश्चित समयसीमा के अंदर स्वतंत्र जांच कराई जाए. मारे गए सभी कैदी विचाराधीन थे और उन्हें आतंकी कहना कानून का उल्लंघन है.’


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