नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘द आर्ग्यूमेंटेटिव इंडियन’ में उनके द्वारा इस्तेमाल गाय’, ‘गुजरात’, ‘हिंदू’ और ‘हिंदुत्व’ जैसे शब्दों पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई है.

सेंसर बोर्ड ने घोष से इन शब्दों को हटाने के लिए कहा है और सेंसर बोर्ड का कहना है कि ‘इन शब्दों के इस्तेमाल से देश की छवि खराब होगी’. हालांकि, अब तक इस बारे में लिखित में नहीं मिला है.

डायरेक्टर सुमन घोष ने बुधवार को कहा, ”सेंसर बोर्ड चाहता है कि हम फिल्म से गाय, गुजरात और हिंदुत्व जैसे चार शब्दों को म्यूट कर दें. बोर्ड के कोलकाता स्थित रीजनल ऑफिस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के बाद हम तीन घंटे तक बैठे रहे. सेंसर बोर्ड के मेंबर्स ने फिल्म के एक-एक सीन को काफी गौर से देखा. इसके बाद U/A सर्टिफिकेट लेने के लिए मुझसे 4 शब्दों पर बीप लगाने की बात कही गई.”

उन्होंने कहा, “वे अमर्त्य सेन द्वारा साक्षात्कार के दौरान इस्तेमाल किए ‘हिंदू भारत’ और ‘हिंदुत्व’ शब्दों को भी हटवाना चाहते हैं. अजीब बकवास है यह.”  घोष ने कहा, “हमें पता है कि देश में क्या हो रहा है. ‘उड़ता पंजाब’, ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ जैसी फिल्मों पर विवाद हो रहा है. लेकिन मैंने इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि बिना किसी पटकथा के तैयार वृत्तचित्र के साथ भी वैसा ही बर्ताव किया जाएगा.”

उन्होंने कहा, “सबसे बड़ी बात यह है कि जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त इतनी बड़ी शख्सियत द्वारा कहे गए शब्दों को हटाया जा रहा है, तो इससे यही प्रतीत होता है कि चीजें किस हद तक पहुंच चुकी हैं. इस तरह का सीधे-सीधे गवाह बनने के बाद मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूं, मैं हैरान हूं.”


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