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भारतीय थल सेना का एक आदेश, विवाद की शक्ल लेता जा रहा है। मामला धर्म के मुताबिक दाढ़ी बढ़ाने का है, जिसकी वजह से एक सिपाही को नौकरी के लिए ‘अयोग्य’ बताकर सेवा मुक्त कर दिया गया। दाढ़ी के आधार पर सेवा मुक्त किए गए सिपाही ने मामले को आम्र्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल की कोच्चि बेंच में उठाया, लेकिन वहां भी सेना के फैसले को सही बताया गया।

34 वर्षीय मक्तुमहुसैन, भारतीय सेना के आर्मी मेडिकल कॉर्प्स में बतौर सिपाही साल 2001 से सेवारत था। कुछ वषों पहले उसने अपने कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) से धर्म के आधार पर दाढ़ी बढ़ाने की अनुमति मांगी थी, जिसे सीओ ने स्वीकार करते हुए कहा था कि उसे अपना नया परिचय पत्र बनवाना होगा तथा बचा हुआ पूरा सेवाकाल इसे दाढ़ी के साथ ही पूरा करना होगा।

सीओ ने आर्मी मुख्यालय के पत्र संख्या 1951 तथा 1978 के आधार पर मक्तुमहुसैन को दाढ़ी बढ़ाने की अनुमति दी थी। लेकिन जल्द ही पता चला कि 1991 में रक्षा मंत्रलय के आदेश के बाद धर्म के आधार पर दाढ़ी बढ़ाने के आदेश को रद कर दिया गया था। इसका पता चलते ही सीओ ने मक्तुमहुसैन को क्लीनशेव होने के लिए कहा। रक्षा मंत्रलय के आदेश के अनुसार, सेना में सिख कर्मियों के अलावा किसी और धर्म मानने वालों को दाढ़ी बढ़ाने की अनुमति नहीं है।


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