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मिल्लत के दुःख पर आंसू बहाने वालों की कमी नहीं हैं लेकिन उसी मिल्लत के आंसू पोछने वालों को ढूंडा जाएँ तो बमुश्किल ही कोई मिलता हैं. ऐसे में अल-अमीन मिशन संस्था ने मिल्लत की बेटियों के सपने को पूरा करने का बीड़ा उठाया हैं.

नवभारत टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक अल-अमीन मिशन स्कूलों की एक चेन है जो बंगाल में मुस्लिम समुदाय के छात्रों को अच्छी शिक्षा देने के अलावा विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम के लिए तैयार करता है. यह मिशन केवल लड़कियों को ही नहीं गरीब तबके से आने वाले मुस्लिम समुदाय के लड़कों को भी तैयार करता है. इस संस्था के बंगाल में 50 स्कूल हैं और इसकी ब्रांच रांची, पटना, त्रिपुरा और असम में भी खुल चुकी हैं.

जब गुरुवार को पश्चिम बंगाल JEE (मेडिकल) का रिजल्ट आया तब 24 परगना के गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. गांव की सफिना खातून ने यह परीक्षा न केवल पास की बल्कि उसकी रैंक 77 आई. सफिना की मां एक छोटी टेलर हैं और परिवार की माली स्थिति काफी खराब है.

बीड़ी बनाने वाले परिवार से आने वाली रजिया सुल्तान की मेडिकल टेस्ट में 82वीं रैंक आई है. रजिया आठवीं क्लास से इस स्कूल में पढ़ रहीं हैं. ये दोनों अल्पसंख्यक समुदाय की उन 84 लड़कियों में से हैं जो अल-अमीन मिशन की मदद से मेडिकल एंट्रेंस पास कर सकीं हैं.


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