दंगल और पहलवानों के लिए चर्चित गाज़ियाबाद का बम्हैटा गांव बीते हफ्ते भर से सुर्खियों में है. यहां अखाड़े में पहलवानी के गुर सीख रही भीड़ ओलंपिक पदक का सपना नहीं बुन रही है.

ये ‘अस्तित्व’ बचाने की मुहिम पर है. राष्ट्र रक्षा और हिंदू स्वाभिमान को जगाना इनका संकल्प है. इस गांव में एक किनारे पर ‘हिंदू स्वाभिमान’ के राष्ट्रीय महामंत्री अनिल यादव का घर है, जिनकी अगुवाई में यह अभियान चल रहा है.

अनिल यादव के बुज़ुर्ग पिता वीरपाल (78) घर के दरवाज़े पर ही बैठे रहते हैं. बेटे को बुलाने से पहले वह आगंतुक के बारे में ठीक से जान लेना चाहते हैं. बातचीत में वीरपाल साफ कर देते हैं कि उनका बेटा शरीफ़ है लेकिन अन्याय नहीं देख सकता. वह मौके पर ही फैसला करने का आदी है.

मज़बूत कदकाठी के अनिल यादव पहलवानी सीखते हुए जवान हुए हैं लेकिन अपना हुनर अब अखाड़े में नहीं दिखाते. इस्लामिक जेहाद और भारतीय मुस्लिम समाज को वह मौजूदा दौर की सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं.

अनिल इस्लामिक जेहाद और भारतीय मुस्लिम समाज को वह मौजूदा दौर की सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं

अनिल के मुताबिक, ‘हिंदू समाज गप्प बहुत मारता है. करता कुछ नहीं, लेकिन ढिंढोरा खूब पीटता है. हम चाहते हैं कि हिंदू समाज गप्पबाज़ी से निकलकर वास्तव में मजबूत बने.’ अनिल का इशारा समाज को इस्लामी जेहाद से आसन्न खतरे की ओर था. हिंदुओं के साथ अन्याय की भावना अनिल के भीतर गहरे तक बैठी हुई है.

उनका दावा है कि भारत का हिंदू हर जगह कुचला जा रहा है. मुज़फ्फरनगर से मालदा तक उसपर अन्याय हुआ है. बिसहड़ा में अखलाक की मौत पिटाई से नहीं हार्टअटैक से हुई लेकिन ढंग से जांच नहीं की गई. उलटा उसके परिवार को घर और राशि देकर मुसलमानों को खुश किया गया है.

उन्हें किसी सरकार पर अब भरोसा रहा नहीं, इसलिए आत्मरक्षा ही आखिरी विकल्प है.अनिल और उनका संगठन हिंदु स्वाभिमान पिछले हफ्ते तब सुर्खियों में आ गया जब मीडिया में इस बाबत खबरें चली कि उनके गांव में बच्चों को हथियारबंद प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो भी प्रसारित हुईं. यह बात कही गई कि देश पर आईएस के बढ़ते खतरे को देखते हुए हिंदू युवाओं को इससे निपटने के लिए तैयार रहना होगा.

सुलगती सांप्रदायिकता

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘हिंदू स्वाभिमान’ नाम के इस अभियान ने अचानक से रफ्तार पकड़ी है. इसकी कमान मेरठ में रहने वाली एडवोकेट चेतना शर्मा के पास है. वो इस संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

चेतना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठन दुर्गा वाहिनी से भी जुड़ी हैं. मेरठ से करीब 40 किलोमीटर दिल्ली की तरफ रोरी गांव में सक्रिय कार्यवाहक अध्यक्ष परमिंदर आर्य सेवानिवृत्त सेना के जवान हैं. इसी गांव में बच्चों को हथियाबंद प्रशिक्षण देने की बात सामने आई थी. यहां से 35 किलोमीटर आगे बढ़ने पर बम्हैटा गांव आता है जहां का कामकाज महामंत्री अनिल यादव खुद देखते हैं.

मेरठ से करीब 40 किलोमीटर दिल्ली की तरफ रोरी गांव में बच्चों को हथियाबंद प्रशिक्षण देने की बात सामने आई थी

गाजियाबाद में डासना का एक मंदिर ‘हिंदू स्वाभिमान’ का हेडक्वॉर्टर है. इसके पुजारी स्वामी नरसिम्हानंद सरस्वती हैं. नरसिम्हानंद कहते हैं कि हमारा काम मामूली स्तर पर है. हम देश में सैन्य सेवा की बहाली चाहते हैं. हम चाहते हैं कि इजराइल की तर्ज पर तीन साल का सैन्य प्रशिक्षण सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य कर दिया जाए. प्रशिक्षण के बाद वह फौजी जीवनभर आत्मरक्षा कर पाएगा. हम इसके लिए अभियान चलाने पर भी विचार कर रहे हैं.

नरसिम्हानंद जिस मंदिर में रहते हैं, वहां मुसलमानों के प्रवेश की मनाही है. वह कहते हैं, ‘मंदिरों में मुसलमान पाठ-पूजा करने नहीं आते. वे हमारी बहू-बेटियों को छेड़ते हैं. हमारा दुख यह है कि हिंदू कभी अपने समाज के लिए आवाज़ नहीं उठाता और मुसलमान कभी चुप नहीं बैठता.’

हिंदू युवाओं को जगाने के लिए वह मुसलमान समाज के बीच से ही मिसाल देते हैं. वह कहते हैं, ‘इस्लामिक स्टेट सीरिया में लड़ रहा है लेकिन उनके आतंकवादी रुड़की और मेरठ में पकड़े जा रहे हैं. कब तक हम इन्हें झेल पाएंगे?’

फैलता दायरा

हिंदू स्वाभिमान खुद को सिर्फ पश्चिमी उत्तर-प्रदेश तक सीमित नहीं रखना चाहता. वह धीरे-धीरे अन्य राज्यों में पांव पसार रहा है. महामंत्री अनिल के मुताबिक हरिद्वार, जयपुर, बीकानेर, इंदौर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में संगठन के कोर सदस्य बन चुके हैं. अब वे अपने-अपने इलाक़ों में संगठन का विस्तार करेंगे.

बावजूद इसके कि संगठन इंटलिजेंस एजेंसियों की निगाह में आ चुका है. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक पक्ष यह है कि न तो इस हिंदू स्वाभिमान संगठन से जुड़े लोगों को और न ही स्थानीय जिला प्रशासन को इस बात की चिंता है कि युवाओं के मन में एक समुदाय के प्रति जहर का बीज बोया जा रहा है.

जिला प्रशासन को इस बात की चिंता नहीं है कि युवाओं के मन में एक समुदाय के प्रति जहर का बीज बोया जा रहा है

लड़कों को हथियारबंद प्रशिक्षण देने वाले मीडिया में खबरें आने के बाद अब बेहद सतर्क होकर कहते हैं कि ये तो परंपरागत खेल का हिस्सा है.चुंकि हमारा गांव पहलवानों का गांव है इसलिए यहां इस तरह की गतिविधियां चलती रहती है.

इस पूरे मामले में प्रशासन का रवैया कहीं ज्यादा चिंतनीय है. 21 जनवरी को दिल्ली से इंटलिजेंस ब्यूरो की एक टीम ने दोनों गांवों, बम्हैटा और रोरी, का दौरा किया. अनिल यादव, परमिंदर आर्य समेत सभी पदाधिकारियों से पूछताछ की. इनके पास मौजूद हथियार वगैरह खंगालकर टीम वापस लौट गई.

आईबी के एक सूत्र बताते हैं कि टीम को कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है. हिंदू स्वाभिमान की गतिविधियां सामान्य है.कमोबेश यही रवैया स्थानीय गाज़ियाबाद पुलिस और लोकल इंटलिजेंस यूनिट की टीम का भी है. उसे भी इतने खुलेआम इस्लाम से खुद को खतरा होने और उससे निपटने के लिए तैयार रहने जैसी बातें सामान्य लगती हैं.

आईबी के एक सूत्र बताते हैं कि जांच टीम को हिंदू स्वाभिमान की गतिविधियां सामान्य लगीं

लिहाजा राष्ट्रीय मीडिया में उछलने के एक हफ्ते बाद भी हिंदू स्वाभिमान संगठन की गतिविधियां अपने ढर्रे पर आगे बढ़ रही हैं.

गाजियाबाद पुलिस ने जो रिपोर्ट तैयार करके राजधानी लखनऊ भेजी है वह लीपापोती से ज्यादा कुछ नहीं है. गाजियाबाद के एसपी सिटी डॉ. अजय शर्मा के मुताबिक उन्हें तफ्तीश में ऐसा कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है जिसे गैरकानूनी कहा जा सके. वे लोग जो कुछ करते हैं वह उनका पारंपरिक खेल है. उनके पास से किसी तरह का अवैध हथियार आदि की कोई बरामदगी भी नहीं हुई है.

कमोबेश यही राय जिले के एसएसपी धर्मेंद्र यादव की भी है. उनके मुताबिक लोकल इंटलिजेंस यूनिट की रिपोर्ट में सबकुछ सामान्य है.गाज़ियाबाद पुलिस के एक अफसर नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहते हैं, ‘इस मामले में कुछ मिलना-जुलना नहीं है. तीरंदाज़ी और लट्ठबाज़ी पर आर्म्स एक्ट तो लगाया नहीं जा सकता.

जिन तलवारों से बालक अभ्यास कर रहे हैं, उनमें धार तक नहीं है.’ अफसर के मुताबिक अगर बम या राइफल रखें तो उसपर कार्रवाई की जाए. अब छोटे-छोटे बालक अगर एयरगन लेकर खड़े हैं तो उनपर पुलिस क्या कार्रवाई कर सकती है.

अंतिम लक्ष्य

संगठन के महामंत्री अनिल यादव कहते हैं कि अखाड़ा, तीरंदाज़ी, लट्ठबाज़ी और तलवारबाज़ी हमारे गावों के पारंपरिक खेल हैं. हम ये अभ्यास तन-मन को स्वस्थ रखने के लिए करते हैं.

जब तक हिंदू युवा भीतर से स्वस्थ नहीं होंगे, वे कोई लड़ाई नहीं जीत सकते. हमें हमारी शांति कचोटती है. हिंदू स्वाभिमान के सभी पदाधिकारियों से बात करने पर पता चलता है कि उनके निशाने पर मुसलमान हैं. चाहे वो रक्का में लड़ रहे इस्लामिक स्टेट के लड़ाके हों, मालदा में प्रदर्शन करने वाले भारतीय मुसलमान या फिर कोई अन्य.

अनिल यादव कहते हैं कि हिंदू युवा भीतर से स्वस्थ नहीं होंगे, वे कोई लड़ाई नहीं जीत सकते. हमें हमारी शांति कचोटती है

अनिल कहते हैं कि हम एक-47 से लैस आतंकी का सामना लाठी और तलवारों से नहीं कर सकते लेकिन आसपास वालों को ठीक कर सकते हैं. संगठन की एक और चिंता मुसलमानों की आबादी है.

अनिल विश्वास के साथ कहते हैं कि भारत में जनसंख्या विस्फोट होने ही वाला है. हमारे संगठन के कार्यकर्ताओं ने खून से चिट्ठी लिखकर यूपी के 18 ज़िलों के डीएम को सौंपी थी.

इनमें नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है. उद्देश्य यह था कि इस मामले की तरफ सरकार का ध्यान जाए और आबादी नियंत्रण का कानून बनाया जाए. अनिल चाहते हैं कि कानून ऐसा हो कि दो के बाद अगर कोई तीसरी संतान पैदा करता है तो उसपर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

राजनीतिक रंग

पूरे मामले का राजनीतिक स्वरूप भी बेहद दिलचस्प है. बम्हैटा गांव शत प्रतिशत यादव बहुल गांव है, परंपरागत रूप से मुलायम सिंह यादव का समर्थक. लेकिन 2014 में मोदी लहर सबको बहा ले गई.

सारे युवा मोदी समर्थक हो गए और सारी सीटें भाजपा की झोली में चली गईं. कोई आश्चर्य नहीं है कि इस बदली हुई फिजा में मुलायम सिंह को बार-बार अयोध्या याद आ रहा है.

जब यूपी के सारे युवा मोदी समर्थक हो गए तो अब मुलायम को भी बार-बार अयोध्या याद आ रहा है

अतीत में भी भाजपा और सपा अंदरखाने में इस तरह की जुगलबंदिया करते रहे हैं. जिससे वोटों का ध्रुवीकरण आसान हो जाता है.

इस मामले में जो रवैया केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली आईबी और राज्य सरकार की पुलिस मशीनरी का है वह इसके राजनीतिक पक्ष को उजागर करने के लिए पर्याप्त है.

खुलेआम इतनी सांप्रदायिक बातें करने वालों को पुलिस कार्रवाई के लायक तक नहीं समझती, बल्कि उसकी गतिविधियां जारी हैं. जाहिर यह 2017 की चौपड़ है जिस पर सपा और भाजपा अपने पाशे फेंक रहे हैं.

  • SN MALIK 

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