हाल ही में सेना ने प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना  मेक इन इंडिया  के तहत देश में बनी रायफल में कई कमियां होने की वजह से खारिज कर दिया था. अब  3600 करोड़ की लगाकर से बनी आकाश मिसाइल को कैग ने अपनी रिपोर्ट में फ़ैल करार दिया.

सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार जमीन से हवा में मार करने वाला एक तिहाई आकाश मिसाइल बुनियादी परीक्षणों में असफल रहा है.  आकाश का निर्माण सरकारी कंपनी भारत इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स द्वारा किया गया था. जिसके बदले भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड को इसका 95 फ़ीसदी भुगतान भी हो चुका है.

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रिपोर्ट में कहा गया कि लेकिन एक भी मिसाइल सिस्‍टम निर्धारित 6 स्‍थानों में से कहीं भी इंस्‍टॉल नहीं किया जा सका है जबकि अनुबंध पर हस्‍ताक्षर हुए सात वर्ष का समय बीत चुका है. सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी ने नवंबर 2010 में ही छह आकाश स्क्वाड्रन को चीन को टक्कर देने के लिए उत्तर-पूर्व की सीमा पर तैनाती की मंजूरी दे दी थी,  लेकिन परीक्षणों में असफलता के कारण इसको तैनात नहीं किया जा सका है.

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रिपोर्ट के अनुसार, 2014 में वायुसेना ने क्वॉलिटी कंट्रोल के तहत 20 मिसाइलों का टेस्ट किया, जिनमें से छह मिसाइल असफल रहे. यहां तक कि दो तो अपने लॉन्च पैड से भी उड़ान नहीं भर सके. रिपोर्ट में साफ कहा गया कि  यु​द्ध जैसी किसी भी स्थिति में आकाश मिसाइल का इस्तेमाल भरोसेमंद नहीं है और इसी कारण इन्हें पूर्वी सीमा पर तैनात नहीं किया जा सकता.

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