ajmer dr

दिल्ली – जमीअतुल उलमा  के अजमेर में दरगाह की जमीन पर विश्वविद्यालय बनाने के प्रस्ताव पर अंजुमन सैयद ज़ादगान खुद्दाम दरगाह अजमेर व सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि ख्वाजा के दुश्मनों को ख्वाजा की जमीन किसी कीमत पर नहीं दी जा सकती है।

अजमेर से बात करते हुए एडवोकेट सैयद इकबाल अहमद चिश्ती ने कहा कि कानूनी तौर पर दीवान सैयद ज़ैनुल आबेदीन दरगाह के किसी भी जमीन के मालिक नहीं हैं । इन को दरगाह की जमीन देने का कोई अधिकार नहीं हे.दीवान जैनुल आबेदीन विश्वविद्यालय का बहाना करके  दरगाह अजमेर की ज़मीन  को अपनी मिल्कियत में लेना चाहते हैं इसलिए यह सारा नाटक हो रहा है।

सैयद इकबाल चिश्ती से जब यह पूछा गया कि क्या मौलाना महमूद मदनी की  संगठन जमीअतुल उलमा  विश्वविद्यालय के बहाने अजमेर में वहाबी विचारधारा को बढ़ावा देना चाहती है तो उन्होंने कहा कि यह हमेशा अच्छे कामों का सहारा लेकर बुरा काम किए हैं। कभी नमाज़ का सहारा लेकर तो कभी शिक्षा का सहारा लेकर लोगों को कट्टरपंथी की ओर ले जाते हैं।

अंजुमन सैयद ज़ादगान खुद्दाम  दरगाह अजमेर शरीफ के सचिव सैयद वाहिद  हुसैन चिश्ती अंगारा शाह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सैयद ज़ैनुल आबेदीन की नीयत बिल्कुल साफ नहीं है वह जमीन हड़पना चाहते हैं दीवान इससे पहले भी दरगाह की जमीन पर कब्जा जमा चुके हैं और आगे भी विश्वविद्यालय के नाम पर दरगाह की जमीन को अपनी मिल्कियत में लेना चाहते हैं।

ईमान तंजीम  के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय वक्फ परिषद के सदस्य इंजीनियर मोहम्मद हामिद नागपुर  ने बात करते हुए कहा कि वहाबियों के साथ मिलकर दीवान सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की है। इससे दीवान सैयद ज़ैनुल आबेदीन का असली चेहरा सामने आ गया है यह सूफी मुसलमानों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं ऐसे इंसान से लोगों को  दूरी बना लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब ख्वाजा के दुश्मनों से कोई मिल जाए तो ऐसे व्यक्ति को इस पद से बर्खास्त कर देना चाहए. दरगाह कमिटी को चाहिए दीवान सैयद ज़ैनुल आबेदीन को दीवान के पोस्ट से हटा दें  ताकि दरगाह इन लोगों के बुरे नियत से सुरक्षित रह सके।

इंजीनियर मोहम्मद हामिद ने आगे बात करते हुए कहा कि वहाबी विचारधारा के लोग हमेशा आतंकवाद में लिप्त रहे हैं दुनिया भर में चलने वाले आतंकवादी संगठनों का संबंध दारुल उलूम देवबंद से है, तालिबानी आतंकवादी देवबंद से जुड़े हुए हैं।

उनकी तालिबानी विचारधारा  पूरी दुनिया के मुसलमानों व मानवता के लिये खतरा है .अभी इस विचारधारा के लोग  ख्वाजा गरीब नवाज से आस्था का ढोंग रचा के अजमेर दरगाह और वहाँ की  मस्जिदों पर कब्ज़ा करने  का सपना देख रहे हैं अगर उनका यह सपना पूरा हुआ तो उनकी तबलीगी जमात  के कट्टरपंथी  तत्वों दुवारा खुवाजा गरीब नवाज के खिलाफ लगातार ज़हर उगला जायेगा.

और यह बात जग ज़ाहिर हो गई है कि वहाबी विचारधारा कट्टरपंथ फैलाती है। इसी लिए अब जमीअतुल उलमा  के लोग सूफियों का सहारा लेकर अपने आप को छुपाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पहले बरेली से तौक़ीर रज़ा को बुलाया ताकि बरेली के लोगों को अपने विश्वास में लिया जाए लेकिन जब वहाँ बात नहीं बनी तो अब दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज चले गए और वहां से एक आदमी को तोड़ लिए और वह आदमी भी कुछ सिक्कों के लालच में वहाबी विचारधारा के जाल में आ गया।

मुहम्मद हामिद ने कहा कि कोई भी सूफी सुन्नी  किसी भी हालत में इस बात को सहन नहीं करेगा कि दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज की जमीन वहाबियों को दी जाए हां अगर दीवान के पास कोई निजी जमीन है तो वह चाहे वहाबियों को दें या संघ परिवार को दें हमसे कोई मतलब नहीं है, लेकिन इस में ख्वाजा गरीब नवाज का नाम न लें।

उन्होंने वहाबियों के बारे में बताया कि वहाबी हमेशा देश से गद्दारी और सूफी मुसलमानों को नुकसान पहुंचाते  रहे हैं .

दरगाह खुद्दाम से सैयद सलमान चिश्ती ने बात करते हुए कहा कि दीवान ज़ैनुल आबेदीन अवसरवादी हैं और इनके  बुरे इरादे हैं.इन को जब कहीं किसी से अपना फायदा नज़र आता है तो उससे मिल जाते हैं। यहां भी वहाबियों ने कुछ सिक्का दे दिया है और उनके पास कोई जमीन नहीं है जिस पर विश्वविद्यालय का निर्माण किया जाये। अगर दरगाह की जमीन को वहाबियों को देते हैं तो यह किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सुन्नी दावते  इस्लामी अजमेर के कार्यवाहक मौलाना मोईन अहमद ने बात करते हुए कहा सालों से ये लोग ख्वाजा गरीब नवाज के दरगाह को मूर्ति गृह कहते चले आ रहे हैं आज उन्हें ख्वाजा गरीब नवाज से इतनी मुहब्बत कैसे हो गई? उन्होंने कहा कि यह सब वहाबियों का एक धोखा हे. विश्वविद्यालय के बहाने यह  सूफी मुसलमानों के ईमान पर डाका डालना चाहते हैं।

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ इंडिया अजमेर  इकाई के अध्यक्ष इरफान अली  ने बात करते हुए कहा कि सुन्नी सूफी मुसलमान जाग चूका है  और वह जानता है कि सुन्नियों ने जब भी वहाबी विचारधारा को उजागर क्या है  तो उन्होंने अपने पुराने चेहरे को बदल लिया। यह पहला मौका नहीं जब वहाबी विचारधारा  ने चौला बदल कर मुसलमानों को धोखा देने की कोशिश की है बल्कि इस से पहले भी यह लोग इसी तरह सुन्नियों को अपने फरेब में लाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि वहाबियों के इस फरेब को किसी भी हालत में सफल नहीं होने दिया जाएगा।

इस संबंध में जब दरगाह के दीवान सैयद ज़ैनुल आबेदीन से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाते ही अपशब्द और भद्दे ज़बान का इस्तेमाल करते हुये फोन काट दिया.

उल्लेखनीय है कि भारत की सबसे बड़ी युवा और छात्रों की संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ इंडिया ने इस से पहले जमीअतुल उलेमा की चिशतियत नवाजी पर सवाल खड़ा  करते हुये कहा था कि जमीअतुल उलेमा अगर अपने इरादे में साफ है तो पहले खुले आम वहाबियत से तौबा करे और अपने बुजरुगों की उन किताबों को जला कर राख करे जिनमें कहा गया है कि हम वहाबी हैं और जिन किताबों में सूफिया  की गुस्ताखी की गयी है


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

Facebook Comment

Related Posts

loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें