जेएनयू की एक प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी को लेकर जेएनयू में उस कार्यक्रम आयोजन पर विवाद विश्वविद्यालय को बदनाम करने का सरकार का रचा षड्यंत्र था जिस दौरान कथित तौर पर देश विरोधी नारेबाजी हुई थी।

जेएनयू की एक प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी को लेकर जेएनयू में उस कार्यक्रम आयोजन पर विवाद विश्वविद्यालय को बदनाम करने का सरकार का रचा षड्यंत्र था जिस दौरान कथित तौर पर देश विरोधी नारेबाजी हुई थी। उन्होंने कहा कि सरकार विशेष तौर पर विश्वविद्यालयों को निशाना बना रही है क्योंकि उसे छात्रों से भय है जो सोच सकते हैं और विश्लेषण कर सकते हैं।

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जेएनयू प्रोफेसर और जानी-मानी अर्थशास्त्री जयंती घोष ने ‘एनडीए की देश विरोधी नीतियां’ विषय पर एक व्याख्यान के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, ‘वह विश्वविद्यालय को बदनाम करने के लिए रचा गया षड्यंत्र था और इसकी योजना एक उच्च स्तर पर बनाई गई थी। कार्यक्रम के दौरान जो लोग मौजूद थे उनमें तीन नकाबपोश लोग थे जिन्होंने ‘देश विरोधी’ नारेबाजी की और ये परोक्ष रूप से गुप्तचर ब्यूरो से थे। हमारा यही संदेह है।’

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यह व्याख्यान उस जेएनयू में आयोजित होने वाले ‘राष्ट्रवादी अध्यापन’ का हिस्सा है जो कि 9 फरवरी के कार्यक्रम को लेकर विवादों में है। कक्षाओं का आयोजन विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ब्लॉक में हो रहा है जो कि विवादास्पद कार्यक्रम को लेकर छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की राजद्रोह के मामले में गिरफ्तारी के बाद विरोध प्रदर्शन का स्थल रहा है। घोष ने कहा, ‘हमारा यही संदेह है। हम उससे अधिक महत्वपूर्ण है जितना कि हम मानते हैं- हम वास्तव में निशाने पर हैं। इसी कारण से हमें स्वयं का बचाव करना होगा।’ (Jansatta)

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