निसार को बाबरी मस्जिद की शहादत की पहली बरसी पर हुए ट्रेन बम धमाकों के सिलसिले में उठाया गया था। इन बम धमाकों में दो यात्रियों की मौत हो गई थी और 8 घायल हो गए थे। ये गिरफ्तारी 15 जनवरी, 1994 को हैदराबाद पुलिस के द्वारा की गयी थी। पुलिस ने उन्‍हें गुलबर्गा, कर्नाटक स्थित उनके घर से उन्‍हें उठाया था। वह तब फार्मेसी सेकेंड ईयर में पढ़ते थे। निसार को 17 दिन पहले जयपुर जेल से रिहा कर दिया हैं।

निसार के अनुसार ““15 दिन बाद एक एग्‍जाम होना था। मैं कॉलेज जा रहा था। पुलिस की गाड़ी इंतजार कर रही थी। एक व्‍यक्ति ने रिवॉल्‍वर दिखाई और मुझे जबरन भीतर बिठा लिया। कर्नाटक पुलिस को मेरी गिरफ़्तारी के बारे में कोई खबर ही नहीं थी। यह टीम हैदराबाद से आई थी, वे मुझे हैदराबाद ले गए।” निसार को 28 फरवरी, 1994 को अदालत के सामने पेश किया गया।

निसार के बड़े भाई सिविल इंजीनियर जहीरउद्दीन जो मुंबई में रहते थे, उन्‍हें अप्रैल में उठाया गया था। जहीरउद्दीन के अनुसार “हमारे पिता नूरूउद्दीन अहमद ने हमें बेगुनाह साबित करने की लड़ाई के लिए सबकुछ छोड़ दिया। 2006 में जब उनकी मौत हुई, तब भी उन्‍हें उम्‍मीद नहीं थी। अब वहां कुछ भी नहीं बचा। कोई यह कल्‍पना नहीं कर सकता है कि ऐसे परिवार पर क्‍या बीती होगी जिसके दो जवान बेटों को जेल में डाल दिया गया हो।” निसार की तरह जहीर को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन स्‍वास्‍थ्‍य के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्‍हें 9 मई, 2008 को जमानत पर रिहा कर दिया। उन्‍हें फेफड़ों में कैंसर हो गया था।

जहीर ने आगे बताते हुवे कहा कि ”उन्‍होंने अदालत को कई प्रार्थना पत्र लिखे जिसमें उन्‍होंने बताया कि कैसे उन्‍हें फंसाया गया। आखिरकार अदालत में हम दोनों और दो अन्‍य को दोषमुक्‍त करार दिया।”

निसार कहते हैं, “मैंने अपनी जिंदगी के 8,150 दिन जेल के भीतर बिताए हैं। मेरे लिए जिंदगी खत्‍म हो चुकी है। जिसे आप देख रहे हैं, वह एक जिंदा लाश है। मैं 20 साल का होने वाला था, जब उन्‍होंने मुझे जेल में डाल दिया। अब मैं 43 साल का हूं। आखिरी बार जब मैंने अपनी छोटी बहन को देखा था तब वह 12 साल की थी, अब उसकी 12 साल की एक बेटी है। मेरी भांजी तब सिर्फ एक साल की थी, उसकी शादी हो चुकी है। मेरी कजिन मुझसे दो साल छोटी थी, अब वह दादी बन चुकी है। पूरी एक पीढ़ी मेरी जिंदगी से गायब हो चुकी है।

कई कानूनी पचड़ों से जेल में रहते हुए जूझने के बाद रिहा हुए निसार कहते हैं, “मैं सुप्रीम कोर्ट का शुक्रगुजार हूं कि उन्‍होंने मेरी आजादी मुझे लौटाई। लेकिन मेरी जिंदगी मुझे कौन लौटाएगा?


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें