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मुंबई हाईकोर्ट द्वारा मुंबई स्थित हाजी अली दरगाह में महिलाओं को इजाजत देने के बाद भी मुस्लिम महिलाओं ने दरगाह में मजार वाले हिस्से तक जाने से इंकार कर दिया हैं.

धार्मिक नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने अदालत को भी इस मामलें में दखल न देने की नसीहत दे डाली. इंडियन एक्स्प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार जब इंडियन एक्स्प्रेस के पत्रकारों ने दरगाह पर जाकर महिलाओं से इस बारे में बात की तो हैरान कर देने वाली बातें सामने आईं.

शबाना कादरी जो कि मध्यप्रदेश से आईं थीं उन्होंने कहा, ‘महिलाओं को अंदर नहीं जाने दिया जाना चाहिए. हमारी पवित्र किताबों में ऐसा करने से मना किया गया है. यह एक दिव्य संदेश है। इसके साथ खेल नहीं होना चाहिए.

मुंबई के महीम में रहने वाली राहत जो कि 50 साल की हैं उन्होंने कहा, ‘मैं महीने में कम से कम एक बार दरगाह जरूर आती हूं. शरिया में जैसे महिलाओं को कब्रिस्तान के अंदर ना जाने के लिए कहा गया है. वैसे ही यहां आने के लिए भी मनाही है. मैं नहीं जानती कि महिलाओं को अंदर जाने की इजाजत क्यों दी जा रही है.

शौकत बीबी जो कि अपने पति और बच्चे के साथ दरगाह पर थीं उन्होंने कहा, ‘किसी भी पीर की दरगाह को पवित्र होना चाहिए. महिलाएं कभी कभी अपवित्र होती हैं.’ इसके अलावा भी वहां मौजूद कई महिलाओं ने इस आदेश को गलत बताया.

जनसत्ता इनपुट्स के साथ


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