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केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने अडाणी परिवार को स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से मिले लोन के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया हैं. रमेश रणछोड़दास जोशी की RTI पर केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने ये फैसला किया हैं.

इस बारें में सीआइसी का कहना हैं कि स्टेट बैंक ने कर्ज को न्यासीय क्षमता (फिडुशियरी कैपेसिटी) के तौर पर दे रखा है और इसमें वाणिज्यिक भरोसा जुड़ा है.  इसीलिए आरटीआइ कानून की धारा आठ (1)(डी) यानी, वाणिज्यिक विश्वास और (ई) यानी न्यासीय क्षमता (अमानत के तौर पर पड़ी चीज संबंधी प्रावधान) के तहत इस बारे में खुलासा नहीं किया जा सकता.

मीडिया रिपोर्टो के अनुसार, स्टेट बैंक आॅफ इंडिया ने अडाणी समूह की कंपनी अडाणी माइनिंग को क्वींसलैंड में खदानें खरीदने के लिए एक बिलियन डॉलर (लगभग छह हजार करोड़ रुपए) का कर्ज दिया हुआ हैं. इस कर्ज को मिलाकर अडाणी घराना अब तक स्टेट बैंक से कुल 65 हजार करोड़ रुपए ले चुका है.

जोशी ने स्टेट बैंक आॅफ इंडिया से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी कि गौतम अडाणी की कंपनियों को किन प्रावधानों के तहत आॅस्ट्रेलिया में कोयले की खदानें खरीदने के लिए कर्ज दिया गया ? साथ ही जोशी ने कर्ज की मंजूरी के दस्तावेज भी मांगे थे.


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