bukhari

शब-ए-बरात की रात मुसलमानों के लिए एक अजमत की रात हैं। इस रात में मुस्लिम समाज के लोग अल्लाह तआला के आगे सिर झुका कर अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं. पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल.) पर दरुदो सलाम भेजते हैं. लेकिन दूसरी तरफ युवाओं ने शबे बरात की इस पाक रात को हुडदंग और स्टंटबाजी की रात बना दिया हैं.

ऐसे में मुसलमानों की खराब होती छवि से चिंतित मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने मुसलमानों से अपील करते हुवे कहा हैं कि वे अपने बच्चो को इस पाक रात की अहमियत समझाए. साथ ही उन पर नजर रखे कही वो बाइक लेकर स्टंटबाजी ना कर रहे हो.

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जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने युवकों द्वारा हुड़दंग मचाने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि  शब-ए-बरात में स्टंटबाजी करना इस रात की अहमियत के खिलाफ है। यह इबादत की रात है न कि हुड़दंग और स्टंट की। यह कानून और शरियत के हिसाब से भी मुनासिब नहीं है। मां-बाप को इस पर ध्यान देना और अपने बच्चों पर काबू करना चाहिए और उन्हें बाहर नहीं जाने देना चाहिए। इस्लाम यह नहीं कहता कि आप गैर मुस्लिमों के मोहल्ले में शोर मचाए।

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