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पानीपत में एक निजी बस में 1997 में हुए बम विस्फोट के सिलसिले में आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को जिला अदालत ने बरी कर दिया हैं. पुलिस टुंडा पर कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाई हैं. पुलिस ने टुंडा पर लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी होने के साथ पानीपत के बस स्टैंड पर हमले का आरोप लगाया था. हालाँकि टुंडा पर 40 से ज्यादा बम धमाके करने के आरोप हैं.

1 फरवरी 1997 को पानीपत के बस स्टैंड के पास एक प्राइवेट बस में धमाके में टुंडा को आरोपी बनाया गया था. इसके अलावा वह सोनीपत सिनेमा हॉल बम ब्लास्ट और पानीपत के बस कांड में भी मुख्य आरोपी है. अगली तारीख तक टुंडा को करनाल जेल में रखा जाएगा.

अदालत में पेशी से एक दिन पहले बुधवार सुबह टुंडा को जेल में गला दबाकर मारने की कोशिश की भी की गई थी. इससे पहले टुंडा गाजियाबाद की डासना जेल में बंद था और मंगलवार देर शाम को ही टुंडा को करनाल जेल में पानीपत कोर्ट में पेश करने के बाद भेजा गया था.

टुंडा पर हमला करने वाले कैदियों की पहचान अमनदीप और जोगिंदर के रूप में हुई है. टुंडा पर अचानक जेल में हुए इस हमले के पीछे क्या वजह थी. इस बात का खुलासा नहीं हुआ हैं.


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