नई दिल्ली: मिलिए मुंबई के माल्या से। सरकारी बैंकों को लूटने की इनकी कहानी भी बिल्कुल माल्या जैसी है। सिर्फ कंपनी और कंपनी मालिक का नाम बदल गया है। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट जाहिर करती है कि 10 सरकारी बैंकों के कन्सोर्सियम को मुंबई के उद्योगपति कैलाश अग्रवाल को मुंबई के उद्योगपति कैलाश अग्रवाल ने तकरीबन ढाई हजार करोड़ का चूना लगाया है। राजनैतिक रसूख के चलते कैलाश ने सरकारी बैंकों पर दिल्ली से दबाव बनवाया और फिर लूट की एक बड़ी योजना को कामयाबी से अंजाम दिया।

मिलिए एक और माल्या से, जो बैंकों के ढाई हजार करोड़ लेकर हुआ अंडरग्राउंड
बैंकों के साथ 2,555 करोड़ का धोखा
पिछले हफ्ते चार मार्च को कन्सोर्सियम के लीड बैंकर इंडियन बैंक ने वरुण इंडस्ट्रीज के मालिक कैलाश अग्रवाल और उनके साथी किरण मेहता को नोटिस दिए हैं कि उन्होंने 2,555 करोड़ का बैंकों के साथ धोखा किया है। इंडियन बैंक के मुताबिक ढाई करोड़ के इस लोन में यूको बैंक, सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, स्टेट बैंक आॅफ इंडिया, बैंक आॅफ इंडिया आदि प्रमुख थे। उधर मुंबई के बायकुला इलाके में वरुण इंडस्ट्रीज के मुख्यालय पर ताला लगा हुआ है।
राजस्थान से मुंबई पहुंचे अग्रवाल
गौरतलब है कि राजस्थान के रहने वाले कैलाश अग्रवाल ने 1982 में 16 साल की उम्र में स्टील के बर्तन बनाने से कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए कैलाश बंबई चले आए और 1989 में स्टेनलेस स्टील के बर्तन और किचन के सामान का निर्याता शुरू किया। 1995 तक वरुण का कारखाना 100 प्रतिशत एक्सपोर्ट ओरिएटेंड यूनिट बन चुका था। 10 साल बाद 2005 में कैलाश अग्रवाल ने वरुण इंडस्ट्रीज की नींव रखी और शेयर बाजार में करोड़ों रुपये का कारोबार किया।

450 मिलियन यूएस डाॅलर सालाना
आसमान छू लेने की ख्वाहिश रखने वाले कैलाश अग्रवाल ने आॅयल और नैचुरल गैस से लेकर विंड एनर्जी यानी वायु ऊर्जा तक कई क्षेत्रों में एंट्री करके कंपनी को स्थापित किया। कई कंपनियां चला रहीं वरुण इंडस्ट्रीज लिमिटेड समूह की सालाना कमाई 450 मिलियन यूएस डाॅलर रही है।

अचानक क्यों हुए अंडरग्राउंड
यही नहीं, कंपनी का पूरा प्रोफाइल बताता है कि बंबई में रहते हुए कैलाश बड़े-बड़े राजनेताओं के संपर्क में आए और उन्होंने सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रीय बैंकों या पब्लिक सेक्टर बैंकों से कई हजार करोड़ रुपये के लोन लिए। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है कि माल्या की तरह अचानक कैलाश अग्रवाल भी इतने घाटे में कैसे चले गए कि उन्होंने बैंको का पैसा चुकाने के बजाय अंडरग्राउंड हो जाना बेहतर समझा? (इंडिया संवाद)

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