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अहमदाबाद | देश को बहुत जल्द पहली बुलेट ट्रेन की सौगात मिलने वाली है. प्रधानमंत्री मोदी का यह सपना 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है. इसके लिए निर्माण कार्य शुरू हो चूका है. लेकिन बुलेट ट्रेन के उद्घाटन के समय से ही पुरे देश में इसके औचित्य को लेकर बहस हो रही है. कुछ इसके पक्ष में नजर आ रहे है तो कुछ विरोध में. लोगो का तर्क है की पहले मौजूद रेल व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए.

लेकिन इसी बीच एक आरटीआई से बहुत चौकाने वाला खुलासा हुआ है. एक आरटीआई के जवाब में पश्चिमी रेलवे ने जानकारी दी है की मुंबई-अहमदाबाद रूट काफी घाटे का सौदा साबित हो रहा है. क्योकि इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों की लगभग 60 फीसदी सीटे ही भर पाती है. जिसकी वजह से पश्चिमी रेलवे को हर महीने 10 करोड़ रूपए का घाटा उठाना पड़ रहा है. उल्लेखनीय है की बुलेट ट्रेन भी इसी रूट पर प्रस्तावित है.

न्यूज़ एजेंसी IANS के खबर अनुसार, मुंबई के एक आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली ने पश्चिमी रेलवे में आरटीआई लगाकर पुछा था की मुमाबी-अहमदाबाद रूट पर ट्रेन की कितनी सीटे भरी रहती है. इसके अलावा इस रूट पर नई ट्रेन चलाने की योजना के बारे में भी पुछा गया था. पश्चिम रेलवे के मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक मनजीत सिंह ने आरटीआई के जवाब में मुंबई-अहमदाबाद-मुंबई मार्ग की सभी प्रमुख ट्रेनों की सीटों की जानकारी दी.

उन्होंने बताया की इस रूट पर चलने वाली सभी ट्रेनों की करीब 40 फीसदी सीटे खाली रहती है. यह पिछले तीन महीने का आंकड़ा है. इसके अनुसार इन तीन महीनो में रेलवे को 30 करोड़ रूपए का घाटा हुआ है. इसलिए रेलवे की कोई नई ट्रेन शुरू करने की योजना नही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की बिना यात्री के इस रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने का फैसला क्यों किया गया? आखिर एक करोड़ रूपए का कर्ज लेकर चलने वाली इस बुलेट ट्रेन का कर्ज कैसे उतारा जाएगा? क्या एक बार फी करदाताओ के लिए बुरे दिन आने वाले है?


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