नई दिल्ली | कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के से बाद पुरे देश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बहस चल रही है. लोगो का मानना है की जो पत्रकार निष्पक्ष और मुखर होकर लिखते है उनकी जान को सबसे ज्यादा खतरा है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक रिपोर्ट वायरल हो रही है. इस रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार बनने के बाद से देश में 17 पत्रकारों की ह्त्या की जा चुकी है.

उधर एनडीटीवी ने भी एक रिपोर्ट जारी की है. पत्रकारों की सुरक्षा पर निगरानी रखने वाली प्रतिष्ठित संस्था सीपीजे की रिपोर्ट का हवाला देते हुए एनडीटीवी ने बताया की 1992 से अब तक 27 पत्रकार मौत के घाट उतारे जा चुके है. इनमे से ज्यादातर पत्रकार वो है जो राजनितिक या क्राइम पर पत्रकारिता करते थे. हैरान कर देने वाली बात यह है की इन मामलो में से अब तक किसी भी अपराधी को कोई सजा नही हुई है.

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रिपोर्ट में बताया गया है की मरने वाले पत्रकारों में से 50 फीसदी पत्रकार वो है जो भ्रष्टाचार को कवर कर रहे थे. सीपीजे ने भारत में पत्रकारों की सुरक्षा पर भी चिंता जताई है. उनका कहना है की भारत में रिपोर्टर्स को काम करते समय पूरी सुरक्षा नही मिल पाती. यह रिपोर्ट पिछले साल जारी की गयी थी. उधर सोशल मीडिया पर एक नयी लिस्ट जारी की गयी है और दावा किया गया है की मोदी राज में 17 पत्रकारों की हत्या हो चुकी है.

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लिस्ट में उन सभी पत्रकारों के नाम बताये गये है जिनकी हत्या हुई है. इसमें गौरी लंकेश का नाम भी शामिल है. बताते चले की गौरी लंकेश की मंगलवार को कुछ अज्ञात लोगो ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके अलावा गुरुवार को भी एक पत्रकार पर हमला हुआ. बिहार में एक समाचार पत्र के पत्रकार को गोली मार दी गयी. हालाँकि पत्रकार को तुरंत ही अस्पताल में भर्ती करा दिया गया जहाँ उसकी हालत स्थिर बनी हुई है.


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