सन 2000 में रोजगावं रेलवे स्टेशन पर हुए साबरमती एक्सप्रेस में हुए विस्फोट के दो आरोपियों को बाराबंकी अदालत आज बाइज्ज़त बरी कर दिया हैं.

इस मामलें में कश्मीर के पाटन इलाक़े के गुलज़ार वानी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 2001 में उठाया था. इस दौरान उनकी उम्र 28 साल थी और वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे थे. पुलिस ने उन पर साबरमती ट्रेन धमाके के अलावा साल 2000 से पहले हुए आगरा, कानपुर और दिल्ली में इंडिया गेट बम धमाकों से जुड़े दस मामलों में साजिश रचने का आरोप लगाया था. बाकी सभी मामलों में कोर्ट पहले ही उसे बरी कर चुका है.

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हाल ही में प्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने 11 में से 10 आरोपों में बरी होने के बावजूद गुलजार अहमद वानी को जमानत न दिए जाने को ‘शर्मनाक’ बताया था. साथ ही उनके खिलाफ बाराबंकी की अदालत में सुनवाई की धीमी रफ्तार पर भी लताड़ लगाईं थी.

जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने बीते अप्रैल को इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा था, ‘अगर बाराबंकी में वर्ष 2000 में साबरमती एक्सप्रेस में हुए धमाके के मामले में 31 अक्टूबर तक अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं हुए तो एक नवंबर को आरोपी को जमानत दे दी जाएगी.’ कोर्ट ने इसे अगले छह महीने में पूरा करने का आदेश दिया था.

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