देश भर में किसान बदहाली के चलते आत्महत्या कर रहे है. किसानो की आत्महत्या का ये सिलसिला साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है. लोकसभा में एक चर्चा के दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने देश भर में हो रही किसानों द्वारा आत्महत्या का आकड़ा पेश किया.

उन्होंने बताया कि नेशन क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2016 में 11,400 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि 2015 में ये आंकड़ा 12,602 था. उन्होंने कहा कि किसानों की आत्महत्याओं की कमी  वृद्धि करके ही जांच की जा सकती है और सरकार कृषि क्षेत्र में बजट आवंटन में वृद्धि सहित आवश्यक कदम उठा रही है.

मंत्री ने कहा कि भाजपा ने 2014 के आम चुनाव से पहले कृषि उत्पाद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसानों को 1.5 गुना लागत का वादा किया था. उन्होंने कहा कि प्रीमियम फसल बीमा योजना के तहत 3,560 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. जबकि योजना के अंतर्गत किसानों के बीमा दावों के रूप में 3,548 करोड़ की रकम वितरित की गई. इसी तरह, 2015-16 में कुल 4,710 करोड़ रुपया वितरित किया गया.

हालंकि कांग्रेस सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किसानों को फायदेमंद कीमत सुनिश्चित करने में नाकाम रहने के लिए सरकार की आलोचना की, उन्होंने सरकार पर बीमा योजनाओं के जरिए किसानों को नहीं बल्कि कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया.


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